
जयपुर। राजधानी जयपुर में शनिवार शाम ओलावृष्टि के साथ करीब 15 मिनट तक बारिश हुई। अचानक हुई बारिश से सड़कों पर पानी बहने लगा और तेज हवा चलने से मौसम ठंडा हो गया। बारिश के बाद आसमान में बादल छाए रहे। प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। मौसम में आए बदलाव से सुबह-शाम ठंड का अहसास बढ़ गया है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार जयपुर, अजमेर, कोटा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, टोंक, उदयपुर, राजसमंद और नागौर जिलों में बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मेघगर्जना के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की भी संभावना जताई गई है।
वहीं, 18 अक्टूबर को बारां, बूंदी, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर और टोंक जिलों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज हवाओं के साथ वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की आशंका है। मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।
पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अलवर, बीकानेर और सीकर के फतेहपुर में दिन का तापमान करीब 6 डिग्री तक गिर गया। अलवर में दिन के तापमान में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। जयपुर में अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रात में पिलानी का न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री सेल्सियस रहा। पश्चिमी राजस्थान में भी गर्मी का असर कम हुआ। शुक्रवार को चित्तौड़गढ़ में अधिकतम तापमान 38 डिग्री और बाड़मेर में 37.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बारिश ने किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों की स्थिति पैदा कर दी है। सवाई माधोपुर के वजीरपुर क्षेत्र में खेतों में नमी बढ़ने से किसान सरसों की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। किसान खेतों की जुताई कर रहे हैं, ताकि समय पर रबी की फसल बोई जा सके। दूसरी ओर जिले में खरीफ फसलों के पकने के दौरान हुई बारिश से नुकसान की आशंका है। चौथ का बरवाड़ा में 28 मिलीमीटर, जिला मुख्यालय पर 27 मिलीमीटर और खंडार में 23 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इससे मूंग, उड़द, तिल और बाजरे की फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंता बढ़ी है।
मौसम विभाग के अनुसार 19 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसके बाद अगले चार-पांच दिनों में तापमान में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह और नवंबर की शुरुआत में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद राजस्थान में ठंडी हवाओं का असर बढ़ने की संभावना जताई गई है।