
जयपुर। गंभीर मरीज को एयर एंबुलेंस से एसएमएस अस्पताल लाने के बाद सड़क पर ट्रैफिक के बीच अस्पताल तक पहुंचाने की जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी। एसएमएस अस्पताल के निर्माणाधीन 24 मंजिला आईपीडी टावर की 24वीं मंजिल पर ऐसा हेलीपैड तैयार हो रहा है, जहां एयर एंबुलेंस सीधे उतरेगी। करीब 2 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में हेलीपैड की छत डाली जा चुकी है। इसे करीब 3 हजार किलो वजन वाली एयर एंबुलेंस के लैंडिंग और टेकऑफ को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
हेलीपैड का आकार करीब 59.87 मीटर लंबा और 38 मीटर चौड़ा है। हेलिपेड के वजन और कंपन्न को सहन करने के लिए इसे एम-30 आरसीसी तकनीक से तैयार किया गया है। देश के सरकारी अस्पतालों में यह सबसे अधिक ऊंचाई वाला आईपीडी टॉवर है। हेलीपैड पर एविएशन फायर प्रोटेक्शन सिस्टम के साथ डे-लाइट सिस्टम लगाया जाएगा। कोहरा या कम रोशनी होने पर भी लैंडिंग क्षेत्र को रोशन रखने की व्यवस्था होगी। आस-पास की ऊंची इमारतों और मोबाइल टावरों पर एविएशन लैंप लगाए जाएंगे।
ऑटोमेटिक विंड डायरेक्शन सिस्टम हवा की दिशा बताएगा, जबकि एयर-बैंड रेडियो सिस्टम से पायलट और ग्राउंड कंट्रोल के बीच संपर्क रहेगा। हेलीपैड के ठीक नीचे 23वीं मंजिल पर 7 से 10 हजार लीटर क्षमता का डेडिकेटेड वाटर टैंक भी बनाया जाएगा। हेलीपैड के डिजाइन को डीजीसीए की अनुमति मिल चुकी है। पूरे निर्माण के बाद एविएशन संबंधी अंतिम मंजूरियों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
एयर एंबुलेंस से उतरने के बाद मरीज को रैंप के जरिए 23वीं मंजिल पर लाया जाएगा। इसके बाद लिफ्ट से मरीज को वार्ड, आईसीयू या ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचाया जा सकेगा। यानी मरीज को टावर से बाहर निकालकर दूसरे भवन तक ले जाने की जरूरत नहीं होगी। हवा से आया मरीज अस्पताल की छत पर उतरेगा और वहीं से इलाज की अगली कड़ी शुरू हो जाएगी। दावा है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट, ब्रेन, हार्ट और अन्य गंभीर मरीजों की जान गोल्डन ऑवर में बचाई जा सकेगी। अभी तक इस तरह की सुविधा भारत सहित दुनिया भर में चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध है।
7-10 हजार लीटर : नीचे प्रस्तावित फायर वाटर टैंक
60 मिनट : शुरुआती जांच-इलाज को तेज करने का लक्ष्य
दिसंबर 2027 : आईपीडी टावर पूरा करने का लक्ष्य
123 मीटर ऊंचा टावर
1200 बेड की क्षमता का प्रावधान टावर में
20 ओपीडी, 4 कैथ लैब और 16 लिफ्ट
25 से 30 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च होगा मेंटिनेंस पर
एयर एम्बुलेंस की लैंडिंग सामान्य स्लैब पर ही होगी। अतिरिक्त जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ढांचे को एयर एम्बुलेंस के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। पूरा बेस आइआइटी इंजीनियर की देखरेखर में तैयार हुआ है। साथ ही हैलीपेड की लोड कैपेसिटी के लिए एक पायलट को भी कंसल्टेंट के तौर पर नियुक्त किया है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर पूरा काम किया गया है। पूरे ढांचे की डीजीसीए के मानकों के अनुसार भी जांच करवाई गई है।
-आशीष कुलश्रेष्ठ, एक्सईएन, जेडीए