
Jaipur Haveli Treasure: जयपुर में विद्याधर का रास्ते त्रिपोलिया बाजार के एक हवेली में खुदाई के दौरान मिले कथित खजाने का मामला लगातार उलझता जा रहा है। माणक चौक थाना पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि खुदाई के दौरान आखिर क्या-क्या मिला था, कितना सामान मिला था और वह फिलहाल कहां है। मामले में भवन मालिक राहुल सेठी, ठेकेदार और वहां काम करने वाले मजदूरों से भी पूछताछ की जाएगी।
मामला तब सामने आया, जब भवन मालिक राहुल सेठी को शक हुआ कि खुदाई में मिली सभी चीजें उनके पास नहीं पहुंची हैं। पुलिस के अनुसार, एक मजदूर ने मालिक को पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि खुदाई के दौरान मिले पुराने सिक्के और दूसरी कीमती वस्तुओं को ठेकेदार और कुछ मजदूरों ने आपस में बांट लिया और इसकी जानकारी भवन मालिक को नहीं दी। इसी शिकायत के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में भवन मालिक, ठेकेदार और मजदूर, सबके अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पुलिस इन सब के बीच सबूत जुटाकर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है। साथ ही पुलिस अब यह भी जांच रही है कि भवन में निर्माण और खुदाई का काम किस कंपनी या ठेकेदार को दिया गया था। ठेके के समय मालिक और ठेकेदार के बीच क्या शर्तें तय हुई थीं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर खुदाई में सचमुच कोई पुराना खजाना मिला है तो उस पर अधिकार किसका होगा। कानूनी जानकारों के अनुसार, जमीन के अंदर से मिलने वाले पुराने सिक्के, सोना, चांदी या ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं सामान्य संपत्ति नहीं मानी जातीं। ट्रेजर ट्रोव एक्ट (दफीना कानून) के तहत ऐसे मामलों में सबसे पहले सरकार का अधिकार माना जाता है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति यह साबित कर दे कि वह संपत्ति उसके पूर्वजों की है, तो उसके दावे पर भी कानून के अनुसार सोचा जा सकता है।
खुदाई में मिले बताए जा रहे सिक्के आखिर कितने पुराने हैं और उनका इतिहास क्या है, इसका जवाब अब विशेषज्ञ देंगे। मुद्रा विशेषज्ञ प्रिंस का कहना है कि अभी तक उनके पास सिर्फ शुरुआती जानकारी ही पहुंची है। जब पुलिस या संबंधित विभाग जांच के लिए सिक्के उनके पास भेजेगा, तब उनकी बारीकी से जांच की जाएगी। इसके बाद ही पता चलेगा कि ये सिक्के किस दौर के हैं, किस राजा के समय के हैं और इनकी कोई ऐतिहासिक अहमियत है या नहीं।
अब यह भी जांच रही है कि भवन में निर्माण और खुदाई का काम किस कंपनी या ठेकेदार को दिया गया था। ठेके के समय मालिक और ठेकेदार के बीच क्या शर्तें तय हुई थीं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।