जयपुर

कुर्सी महिला पार्षद की, हुक्म पति-रिश्तेदार का! राजस्थान के नगर निकायों में महिला प्रतिनिधित्व की सामने आई हकीकत

राजस्थान में नगर निकायों की बैठकों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति और रिश्तेदारों की मौजूदगी ने महिला प्रतिनिधित्व और महिला सशक्तिकरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Oct 08, 2026
women reservation reality
6 अक्टूबर... जयपुरः विद्याधर नगर जोन की बैठक में पार्षद पति (Photo-Patrika)

जयपुर . जनता ने अपने वार्ड की आवाज उठाने के लिए महिला पार्षदों को चुनकर नगर निगम भेजा, लेकिन निगम की पहली ही बैठकों में महिला पार्षद की जगह उनके पति और रिश्तेदार नजर आने लगे हैं। मंगलवार को विद्याधर नगर के बाद बुधवार को मुरलीपुरा जोन में दिवाली की तैयारी को लेकर बैठक हुई। इसमें भी महिला पार्षदों की जगह उनके पति और बेटे पहुंच गए। बैठक में वार्डों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी थी। लेकिन बैठक की तस्वीर ने चर्चा का रुख ही बदल दिया। यहां कुछ महिला पार्षदों की जगह उनके पति और रिश्तेदार मौजूद रहे। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर निगम में नई बोर्ड व्यवस्था के बाद यह पार्षदों की शुरुआती बैठकों में से एक है। ऐसे में उम्मीद थी कि निर्वाचित पार्षद खुद अपने वार्ड की समस्याएं अधिकारियों के सामने रखेंगी।

2 दिन से उठ रहा मुद्दा, नहीं चेते

यह मुद्दा लगातार दो दिन से उठ रहा है। इसके बावजूद बुधवार को निगम के मुरलीपुरा जोन कार्यालय में महिला पार्षद अपने पति व बेटों को साथ लेकर पहुंचीं। आरोप यह भी लग रहे हैं कि महिला पार्षदों के पति व रिश्तेदार निगम अधिकारियों को दिशानिर्देश दे रहे हैं।

प्रदेश में यही आलम, वार्ड में पति-परिजन की 'सरकार'

नगर निकाय चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ा, लेकिन कई शहरों में कामकाज की तस्वीर अब भी पुरुषों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों से मिले इनपुट बताते हैं कि महिला पार्षदों की जगह उनके पति, पिता और अन्य रिश्तेदार वार्ड की समस्याएं लेकर निगम पहुंच रहे हैं।

5 अक्टूबर... अलवरः कुर्सी पर महापौर सुमनलता, कार्य करते पति।

कहीं यह सक्रियता सामान्य राजनीतिक सहयोग के रूप में सामने आ रही है तो कहीं महिला पार्षदों की भूमिका ही पीछे छूटती दिख रही है। बीकानेर में 80 पार्षदों में 26 महिलाएं हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 8 महिला पार्षद सक्रिय नजर आई हैं।

वार्डों की समस्याओं को लेकर निगम पहुंचने और फील्ड में काम कराने में अधिकतर जगह महिला पार्षदों के पति आगे हैं। कई महिला पार्षद महापौर और उप महापौर चुनाव के दिन ही निगम में नजर आई थीं।

28 महिला पार्षद, सक्रिय सिर्फ 7 ही

भीलवाड़ा में 70 पार्षदों में 28 महिलाएं हैं। इनमें सिर्फ 7 सक्रिय हैं, जबकि शेष के पति और रिश्तेदार काम संभाल रहे हैं। यहां अधिकांश पति पूर्व पार्षद या पार्टी नेता भी हैं। आम जनता भी अपने काम के लिए पार्षद पतियों से मिलती है।

यह तस्वीर गलत है : फैसलों और जनता से संवाद में पुरुष आगे

राजस्थान के नगर निकायों में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ ही एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। कई निगमों में निर्वाचित महिला पार्षदों की जगह उनके पति या परिजन वार्ड की समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं।

भरतपुर: 28 महिला पार्षद हैं, लेकिन स्थानीय इनपुट के मुताबिक 19 के पति कामकाज संभाल रहे हैं।

जोधपुर: 34 महिला पार्षदों में 2-3 को छोड़कर अधिकांश के पति सक्रिय रहने की बात सामने आई है।

अजमेर: 80 में 38 महिला पार्षद हैं। इनमें करीब 30 सक्रिय हैं, जबकि शेष के पति या पिता अधिक सक्रिय बताए जा रहे हैं।

कोटा: तस्वीर अपेक्षाकृत अलग है। 36 महिला पार्षदों में 31 सक्रिय हैं।

पाली: 65 में 27 महिला पार्षद हैं और महापौर नमिता बुबकिया भी महिला हैं, लेकिन कई वार्डों में पति, भाई और अन्य परिजन अधिकारियों व आमजन से संवाद करते नजर आ रहे हैं। अब सवाल महिला प्रतिनिधित्व की संख्या से आगे बढ़कर यह है कि निर्वाचित महिला पार्षदों के अधिकार और जिम्मेदारी वास्तव में किसके हाथ में हैं।

Updated on:
08 Oct 2026 08:58 am
Published on:
08 Oct 2026 08:58 am