जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सुबोध अग्रवाल ने एफआइआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
जयपुर। जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सुबोध अग्रवाल ने एफआइआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में सुबोध अग्रवाल ने हाईकोर्ट से एफआइआर रद्द करने की गुहार की है। याचिका में आरोप लगाया कि जेजेएम में जिन स्वीकृतियों पर विवाद है, उनमें से 95 प्रतिशत कार्यादेश जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधांश पंत के समय बनी वित्त समिति ने स्वीकृत किए थे।
अग्रवाल के अनुसार, कुल वर्कऑर्डरों में से लगभग 95 प्रतिशत पंत के कार्यकाल में दिए गए, जबकि उनके अपने कार्यकाल में स्वीकृत टेंडरों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम थी। ऐसे में उन्होंने जांच एजेंसी की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा है कि जांच का दायरा केवल उनके कार्यकाल तक सीमित रखना उचित नहीं है।
अग्रवाल ने कोर्ट में यह भी कहा कि वे घोटाले के सूत्रधार नहीं, बल्कि अनियमितताओं को सामने लाने वाले अधिकारी रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे ही आईआरकॉन से फर्जी दस्तावेजों की जानकारी मिली, उन्होंने उच्चस्तरीय समिति गठित कर मामले की जांच कराई। उनकी पहल पर संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया और टेंडर निरस्त किए गए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जिनके बयानों के आधार पर ACB कार्रवाई कर रही है, उनके खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। पंत वर्तमान में केंद्र सरकार में सचिव पद पर कार्यरत हैं और पूर्व में राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद पर रह चुके हैं। अब निगाहें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जांच की दिशा क्या होगी और क्या इसके दायरे का विस्तार किया जाएगा।