
Kanhaiyalal Murder Case : राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) अधिनियम के तहत 5 आरोपियों की नियमित जमानत की मांग को ठुकरा दिया है। आरोपी मुस्लिम खान, आशिफ हुसैन, मोहम्मद मोहसीन, मोहसीन खान और वसीम अली की जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और संविधान की मूल भावना पर बेहद कड़े और गंभीर कानूनी तथ्य रखें हैं।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने फैसले की शुरुआत महात्मा गांधी और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की पंक्तियों के साथ की। हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी की पंक्तियां आतंकवाद और छल-क्रेप (धोखाधड़ी) ताकतवर के नहीं, बल्कि कमजोरों के हथियार हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध पंक्तियां, 'सहनशीलता, क्षमा, दया को तभी पूजता जग है, बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है। क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।' के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि राष्ट्र की संप्रभुता और शांति की रक्षा के लिए कानून का सख्त होना कितना अनिवार्य है।
संविधान की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना केवल कागज़ के पन्ने नहीं हैं, बल्कि यह इस राष्ट्र की आत्मा की अमर प्रतिज्ञा है, जो हमें न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व सुरक्षित करने का निर्देश देती है।
हाई कोर्ट ने कहा कि जब कुछ तत्व आतंकवाद को हथियार बनाकर समाज के ताने-बाने को हिंसा से छिन्न-भिन्न करने का प्रयास करते हैं, तो एक गणतंत्र बंधुत्व की रक्षा कैसे कर सकता है? कानून का हथौड़ा केवल सुनवाई समाप्त करने के लिए नहीं गूंजता, बल्कि यह एक संप्रभु गणतंत्र के अटल संकल्प को प्रतिध्वनि देता है।
हाईकोर्ट ने अत्यंत सख्त लहजे में कहा कि आतंकवाद केवल किसी शारीरिक शरीर पर हमला नहीं है, बल्कि यह देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर एक सुनियोजित और नाटकीय प्रहार है। इसका अंतिम उद्देश्य केवल अपराध करना नहीं, बल्कि 'शांति की हत्या' करना है। आतंकवाद कानून के शासन को हटाकर 'भय के शासन' को स्थापित करना चाहता है।
एनआईए अधिनियम, 2008 और गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) शांति के समय में नहीं, बल्कि आवश्यकता की भट्ठी में गढ़े गए हैं। हालांकि संविधान निर्दोषों के लिए अंतिम ढाल है, लेकिन इसे उन लोगों के लिए अभ्यारण्य नहीं बनने दिया जा सकता जो हमारे सामाजिक ताने-बाने को खत्म करना चाहते हैं। कानून के पास उन लोगों को दबोचने के लिए मजबूत दांत होने चाहिए जो राष्ट्र की सद्भावना को निगलने का प्रयास करते हैं।
आरोपियों के वकीलों ने लगभग साढ़े चार साल की लंबी कैद और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) के अधिकारों का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। हालांकि, एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एएसजी राजा ठाकरे ने इसका विरोध करते हुए बताया कि इस मामले में मुकदमे की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर तेजी से चल रही है और कई गवाहों से पूछताछ भी हो चुकी है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह पाया कि चूंकि मुकदमा अंतिम चरण और त्वरित गति से आगे बढ़ रहा है तथा अपराध की गंभीरता और संलिप्तता देखते हुए आरोपी जमानत के हकदार नहीं हैं।
यह मामला 28 जून 2022 को उदयपुर में हुई कन्हैया लाल टेलर की हत्या से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर एक कमेंट करने पर धारदार हथियारों से लैस दो हमलावरों ने उनकी दुकान में घुसकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद हमलावरों ने हत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया था। एनआइए ने 22 दिसंबर 2022 को 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।