Kotputli-Behror District: राजस्थान के नए जिले कोटपूतली-बहरोड़ जिले में सरपंच और प्रधान से लेकर जिला प्रमुख तक सियासी नक्शा बदल गया है।
Kotputli-Behror District: पंचायती राज चुनाव से पहले कोटपूतली-बहरोड़ जिले में वार्ड परिसीमन के बाद सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। नए परिसीमन के तहत जिला परिषद के नए वार्डों का गठन किया है, वहीं पंचायत समितियों में भी वार्डों की संख्या बढ़ी है। इसके चलते पंचायत से लेकर जिला परिषद तक चुनावी मुकाबले पहले से ज्यादा व्यापक और रोचक होने तय माने जा रहे हैं। कई नए चेहरे भी पंचायत चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले में बहरोड़, बानसूर, कोटपूतली और विराटनगर विधानसभा क्षेत्रों के साथ अलवर जिले की मुण्डावर विधानसभा क्षेत्र के नीमराणा और शाहजहांपुर को भी शामिल किया है। इन सभी क्षेत्रों को मिलाकर जिला परिषद के कुल 27 नए वार्ड गठित किए हैं। जनसंख्या वृद्धि और प्रशासनिक पुनर्गठन को आधार बनाकर पंचायत समितियों और जिला परिषद के वार्डों का पुनर्निर्धारण किया है।
विराटनगर पंचायत समिति से 23 ग्राम पंचायतों को अलग कर मैड़ कुण्डला नई पंचायत समिति का गठन किया है। इसके साथ ही जिले में पंचायत समितियों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। पंचायत समिति सदस्य प्रधान का चुनाव करेंगे। पुनर्गठन के बाद सभी 27 जिला परिषद वार्ड नए बने हैं।
नीमराणा 21, बहरोड़ 15, पावटा 19, विराटनगर 15, मैड कुण्डला 15, नारायणपुर 17, बानसूर 27 और कोटपूतली में 17 पंचायत समिति सदस्य वार्ड बनाए गए हैं।
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन के बाद नए जिले में 8 पंचायत समितियों के तहत 240 ग्राम पंचायतें होंगी। इतने ही सरपंच चुने जाएंगे। पुनर्गठन से पहले जिले में 177 ग्राम पंचायतें थीं। विराटनगर क्षेत्र में पहले 31 ग्राम पंचायतें थीं, पुनर्गठन के बाद 16 नई ग्राम पंचायतों का सृजन किया गया। इनमें से 23 ग्राम पंचायतें नवगठित मैड कुण्डला पंचायत समिति में शामिल की गई, जबकि दो ग्राम पंचायतें शाहपुरा पंचायत समिति में चली गई।
| पंचायत समिति | पुनर्गठन से पहले | नव सृजित | कुल |
|---|---|---|---|
| कोटपूतली | 20 | 10 | 30 |
| बहरोड़ | 19 | 6 | 25 |
| विराटनगर | 31 | 16 | 22 |
| पावटा | 24 | 7 | 30 |
| बानसूर | 37 | 8 | 45 |
| नीमराणा | 29 | 11 | 40 |
| नारायणपुर | 17 | 8 | 25 |
| मैड़ कुण्डला | 0 | 23 | 23 |
परिसीमन के बाद कई पंचायतों में पहली बार नए वार्ड अस्तित्व में आए हैं। इससे नए मतदाताओं और नए दावेदारों को सीधा अवसर मिलेगा। गांव-गांव चौपालों, चाय की दुकानों और पंचायत मुख्यालयों पर नए वार्डों की सीमाओं को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पुराने वार्ड टूटने और नए बनने से सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इससे युवाओं, महिलाओं और नए सामाजिक समीकरणों की भागीदारी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।