जयपुर

कौन हैं राजस्थान के कुशाग्र ओझा? तीसरी क्लास से थामा बल्ला, यूं बनाई भारतीय अंडर-19 टीम में जगह

Kushagra Ojha: राजस्थान के युवा क्रिकेटर कुशाग्र ओझा ने भारतीय अंडर-19 टीम में जगह बनाकर अपनी पहचान बनाई है। जानिए उनके परिवार, क्रिकेट सफर और सफलता की पूरी कहानी।
3 min read
Jul 21, 2026
Kushagra Ojha
कुशाग्र ओझा (Photo-IANS)

Kushagra Ojha Biography: राजस्थान के युवा क्रिकेटर कुशाग्र ओझा इन दिनों खूब चर्चा में हैं। श्रीलंका दौरे पर भारतीय अंडर-19 टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करने के बाद लोग उनके बारे में जानना चाह रहे हैं। आखिर कुशाग्र ओझा कौन हैं और यहां तक पहुंचने का उनका सफर कैसा रहा? सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींच लिया है। इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उनकी सालों की मेहनत, परिवार का साथ और क्रिकेट के प्रति उनका जुनून है।

तीसरी क्लास से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

कुशाग्र ओझा का जन्म साल 2009 में जयपुर में हुआ। उनका परिवार मूल रूप से चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी का रहने वाला है, लेकिन अब जयपुर में रहता है। परिवार का कहना है कि कुशाग्र को तीसरी क्लास से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। स्कूल से लौटते ही उनका ज्यादातर समय मैदान में ही बीतता था। धीरे-धीरे उन्होंने क्रिकेट की रेगुलर कोचिंग शुरू की और खेल को लेकर गंभीर हो गए। बचपन से ही उनका एक ही सपना था कि एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश के लिए क्रिकेट खेलें। उसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की।

बैंक मैनेजर के बेटे ने मेहनत से बनाई पहचान

कुशाग्र के पिता ओमप्रकाश ओझा जयपुर के एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर हैं और उनकी मां निशा ओझा गृहिणी हैं। परिवार का कहना है कि कुशाग्र का पूरा ध्यान बचपन से ही क्रिकेट पर था। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेल में भी खूब मेहनत की। उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और जो भी जरूरत पड़ी, उसे पूरा करने की कोशिश की। सालों की इसी मेहनत और परिवार के साथ का नतीजा है कि आज कुशाग्र भारतीय अंडर-19 टीम में अपनी जगह बना चुके हैं।

राजस्थान के एज ग्रुप क्रिकेट में मचाया धमाल

कुशाग्र ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत राजस्थान के एज ग्रुप क्रिकेट से की। 2023-24 सीजन में उन्होंने विजय मर्चेंट ट्रॉफी (अंडर-16) में राजस्थान की तरफ से खेलते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद 2025-26 की कूच बिहार ट्रॉफी उनके करियर का सबसे अहम पड़ाव साबित हुई। इस टूर्नामेंट में उन्होंने राजस्थान अंडर-19 टीम की कप्तानी की और 11 पारियों में 565 रन बनाए। उनके बल्ले से दो शतक और चार अर्धशतक निकले। पूरे टूर्नामेंट में उनका औसत 51.36 रहा। उनके शानदार खेल की बदौलत राजस्थान की टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची और यहीं से कुशाग्र ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

शतक से देशभर में छा गए कुशाग्र

घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद कुशाग्र ओझा को भारतीय अंडर-19 टीम में खेलने का मौका मिला। उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से भुनाया। श्रीलंका दौरे पर अपने पहले अंडर-19 वनडे मैच में ही 92 रन की शानदार पारी खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद दूसरे अंडर-19 टेस्ट में भी उन्होंने शतक जड़ दिया। जब भारतीय टीम मुश्किल में थी, तब कुशाग्र ने संभलकर बल्लेबाजी की और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उनकी इस शानदार पारी के बाद हर तरफ उनकी चर्चा होने लगी और लोग उनके बारे में जानने लगे।

सांवलिया सेठ को चढ़ाया चांदी का बैट

जब कुशाग्र का भारतीय अंडर-19 टीम में चयन हुआ तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई थी। कुशाग्र के पिता ने बताया कि बेटे के चयन के लिए उन्होंने भगवान सांवलिया सेठ से मन्नत मांगी थी। चयन होने के बाद परिवार ने चित्तौड़गढ़ स्थित सांवलिया सेठ मंदिर पहुंचकर 500 ग्राम का चांदी का बैट चढ़ाया और बेटे के उज्ज्वल भविष्य व श्रीलंका दौरे पर शानदार प्रदर्शन की कामना की। इस मौके पर बस्सी और पूरे जिले में खुशी का माहौल देखने को मिला।