पहली बार चारदीवारी की बजाय अन्य मार्ग से निकलेगी रथयात्रा, कृष्ण-बलराम मंदिर जगतपुरा के तत्वावधान में कलेक्ट्रेट सर्किल के पास जंगलेश्वर महादेव मंदिर से शाम पांच बजे से अल्बर्ट हॉल तक भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। पहली बार चारदीवारी की बजाय यहां से लवाजमे के बीच शोभायात्रा निकलेगी। अहमदाबाद में तैयार हुए रथ को बिजली के तारों से बचाने के लिए हाइड्रोलिक सिस्टम लगा होगा। इससे रथ की ऊंचाई कम ज्यादा की जा सकेगी।
जयपुर. त्रिपुष्कर, रवियोग सहित अन्य योग संयोगों में जगन्ननाथपुरी (Jagannathpuri yatra) की तर्ज पर मंगलवार को छोटीकाशी में भी रथयात्राओं (Jagannathpuri Rath Yatra) की धूम रहेगी। आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर रथयात्राएं निकलेंगी। श्रद्धालु भक्तिभाव से भगवान के रथ को खीचेंगे और मार्ग को बुहारेंगे। आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में मंगलवार सुबह सात बजे रथयात्रा महोत्सव मनाया जाएगा। ठाकुर जी के गौर गोविंद विग्रह को चांदी के रथ में विराजमान कर गर्भ मंदिर के पश्चिम द्वार से होते हुए परिक्रमा करवाई जाएगी। भक्तों को पुरी न जाना पड़े इसके लिए यहां ही मंदिर बनाए गए।
दो हजार किलो फूलों से तैयार पुष्पमुकुट
कृष्ण-बलराम मंदिर जगतपुरा (Krishna-Balarama Temple Jagatpura) के तत्वावधान में कलेक्ट्रेट सर्किल के पास जंगलेश्वर महादेव मंदिर से शाम पांच बजे से अल्बर्ट हॉल तक भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। पहली बार चारदीवारी की बजाय यहां से लवाजमे के बीच शोभायात्रा निकलेगी। अहमदाबाद में तैयार हुए रथ को बिजली के तारों से बचाने के लिए हाइड्रोलिक सिस्टम लगा होगा। इससे रथ की ऊंचाई कम ज्यादा की जा सकेगी। गर्भ ग्रह वृंदावन में तैयार करवाया है। रथयात्रा, संकीर्तन टोली में करताल, मृदंगा, हार्मोनियम, इत्यादि वाद्ययंत्र भी बजेंगे। मंदिर अध्यक्ष अमितासना दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, भाई बलदेव, बहन सुभद्रा एक ही रथ में विराजमान होंगे। रथ की लंबाई 30 फीट एवं चौड़ाई 10 फीट और रस्सी 108 फीट की होगी। रथ का रंग जगन्नाथपुरी के रथ जैसा पीला और लाल रंग का होगा। बेंगलुरू से दो हजार किलो इंग्लिश फूलों के अलावा टोंक से मोगरे से भगवान का पुष्पमुकुट तैयार किया है। इसके अलावा वृंदावन की रत्न जड़ित पोशाक खास होगी। नौ दिन बाद मंदिर में 29 जून को भगवान का स्वर्णअलंकार होगा।
सात दिवसीय उत्सव का होगा आगाज
इधर सांगानेर में जगन्नाथपुरी की तर्ज पर यात्रा का उत्सव कई मायनों में खास रहेगा। यहां एक की बजाय सात दिन तक उत्सव मनाया जाएगा। सांगानेर के आराध्य जगन्नाथ की रथयात्रा ठिकाना मंदिर जगन्नाथ, राधा वल्लभ मार्ग से शुरू होकर त्रिपोलिया गेट, बस स्टैंड, मैन बाजार से होते हुए नगर निगम रोड़ स्थित सिंघी सागर बगीची पहुंचेगी। जहां जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा के साथ भडल्या नवमी मंगलवार तक विराजमान रहेंगे। इसी दिन भड़ल्या नवमी को ठाकुर जी के माता लक्ष्मी जी के साथ फेरे संपन्न करवाकर विवाह महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाएगा। शाम छह से नौ बजे तक भजन संध्या आयोजित की जाएगी। अगले दिन 28 जून को रथयात्रा सिंघी सागर बगीची से रवाना होकर मालपुरा गेट के अंदर पहुंचेगी जहां ठाकुर जगन्नाथ जी (काल्या ठाकर) के विवाह महोत्सव के उपलक्ष्य में गुदरी मेला आयोजित होगा जिसमें वर्षों से चले आ रही पारंपरिक नृत्य गायन का आयोजन होगा। तीन साल बाद पुन: इस बार शाम छह बजे निज मंदिर से आरती के साथ ही अन्य कार्यक्रम होंगे। रथयात्रा सांगा सर्किल पर आरती उतारी जाएगी। इसके बाद मुख्य बाजार में पुष्प वर्षा कर 1100 दीपकों से आरती होगी।
समाजसेवी मुरलीधर शर्मा ने बताया कि बीते 100 साल से यात्रा निकाली जा रही है। यह मंदिर 500 साल पुराना मंदिर है। भगवान जगन्नाथ के अलावा बहन सुभद्रा, बलराम विराजमान हैं। विग्रह पुरी से चंदन की लकड़ी के बने हैं। जयपुर के नगर सेठ ने मंदिर का निर्माण करवाया। जगन्नाथपुरी की तरह नौ दिन बाद भगवान की शादी होगी।
यहां भी होंगे कार्यक्रम
150 साल पुराने नाहरगढ़ रोड स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में पुजारी मुकेश शर्मा के सान्निध्य में विशेष पूजा अर्चना होने के साथ ही अभिषेक होंगे। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ अकेले विराजमान हैं। पुरी से विग्रह लाया गया। भगवान के हाहाकार के समय का मुंह खुलने वाला विग्रह यहां हैं। बारह भाइयों का रास्ता स्थित मंदिर और राधा दामोदर जी मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। खासतौर पर शहर स्थापना के समय से इन विग्रहों को पुरी में तैयार कर जयपुर लाया गया। यह सभी विग्रह काष्ठ के बने हैं। धाभाई जी का खुर्रा सहित अन्य जगहों पर भी मंदिर हैं।
एक किमी.के दायरे में निकलेगी यात्रा
मानसरोवर धौलाई स्थित इस्कॉन मंदिर प्रबंधन की ओर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा महारानी की रथयात्रा मंदिर परिसर के एक किमी. क्षेत्र में शाम 5:30 बजे से निकलेगी। ताकि यातायात बाधित न हो। भक्त जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ को खींच सकेंगें। इधर बंगाली समाज की ओर से शहर में जगन्नाथ महाराज की रथ यात्रा शाम 4.30 बजे से जेएलएन मार्ग स्थित वेंकटेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर सिद्धार्थ नगर एच ब्लॉक स्थित शिव हनुमान मंदिर तक जाएगी। संयोजक सोमेंदु घोष ने बताया कि रथ को सभी समाज के भक्त रस्सी से खीचेंगे। इसके बाद पुनः 28 जून को यात्रा शिव हनुमान मंदिर से वेंकटेश्वर मन्दिर तक जाएगी।
जगन्नाथ रथ यात्रा पर्व का महत्व
ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि जगन्नाथ रथ यात्रा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। जगन्नाथ दो शब्दों के मेल से बना है। इसमें जग का अर्थ ब्रह्मांड और नाथ का अर्थ भगवान से है। भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का ही रूप है, जो कि भगवान विष्णु के अवतारों में एक हैं। स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में भी रथ यात्रा का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा में जुलूस के दौरान रथ को खींचना शुद्ध भक्ति से जुड़ा है। इससे व्यक्ति के ऐसे पाप नष्ट होने के साथ ही सौ यज्ञ कराने जितने पुण्यफल की प्राप्ति होती है।