
Rajasthan : भीलवाड़ा. राजस्थान के खान एवं भूविज्ञान विभाग में एक अजीबोगरीब और विरोधाभासी स्थिति पैदा हो गई है। यहां राज्य सरकार की अधिसूचना पर एक अधीक्षण खनिज अभियंता का आदेश भारी पड़ता नजर आ रहा है। नियमों के इस सीधे टकराव के कारण राजस्थान के खनिज व्यापारियों में भारी असमंजस और परेशानी का माहौल है। दरअसल, सरकार ने व्यापार को सुगम बनाने के उद्देश्य से 3 जनवरी 2025 को अधिसूचना जारी की थी। इसमें प्रदेश के केवल चार खनिज एमसेंड, क्रेशर गिट्टी, चुनाई पत्थर व बजरी पर टीपी (ट्रांजिट पास) का प्रावधान रखा था। सरकार ने शेष मिनरल्स माइका, बैराइट्स, लाइम स्टोन, आयरन, और जिंक से टीपी की अनिवार्यता को हटा दिया था।
राजस्थान सरकार के इस फैसले के उलट जयपुर वृत्त के अधीक्षण खनिज अभियंता एनएस शक्तावत ने आदेश जारी कर जयपुर, अलवर, सीकर और झुंझुनू के खनि अभियंताओं तथा टोंक, दौसा, नीमकाथाना, और कोटपूतली के सहायक खनिज अभियंताओं को नए निर्देश दिए हैं। इसमें रॉयल्टी पेड खनिज क्वार्टज व फेल्सपार का निर्गमन डीलर्स की ओर से ई-वेबिल के माध्यम से किया जा रहा है, जिसे रोककर टीपी से निर्गमन सुनिश्चित किया जाए।
विभाग ने तर्क दिया कि केंद्र की अधिसूचना 20 फरवरी 2025 के तहत क्वार्टज व फेल्सपार को प्रधान खनिज घोषित किया था। इसलिए राजस्थान मिनरल्स (प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन एंड स्टोरेज) रूल्स, 2007 के तहत इनका परिवहन बिना टीपी के नहीं हो सकता। साथ ही अवैध परिवहन में पकड़े जाने पर 13 जनवरी 2011 के परिपत्र के अनुसार कम्पाउंड राशि वसूलने के निर्देश दिए हैं।
इस आदेश ने खनिज व्यवसायियों को सकते में डाल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि जब सरकार ने 2017 के नियमों को बंद कर दिया था और उक्त चार खनिजों को छोड़कर शेष से टीपी हटा दी गई, तो फिर अब अचानक केवल दो मिनरल्स क्वार्टज व फेल्सपार के लिए टीपी का प्रावधान क्यों लागू किया जा रहा है। क्या अन्य खनिज जैसे माइका, बैराइट्स, लाइम स्टोन, आयरन, जिंक और अन्य खनिजों के लिए पृथक नए कोई नियम लागू किए जाने वाले हैं।
संगठनों का आरोप है कि सरकारी अधिसूचना और स्थानीय स्तर के आदेशों में कोई तालमेल नहीं है। इन विरोधाभासी नियमों और लालफीताशाही के चलते प्रदेश का खनिज व्यापारी खासा परेशान है। इससे व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। व्यापारियों का यहा तक कहना है कि यह आदेश भी केवल कुछ जिलों के लिए लागू किया गया है। इसे लागू करना है तो पूरे प्रदेश में लागू किया जाए।
बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार के नियमों पर भारी एक अधीक्षण खनिज अभियंता का आदेश है। यह समझ से परे है कि 2025 में टीपी क्यों हटाई गई और अब पुनः लागू करने के पीछे इसका क्या उद्देश्य हैं। यदि 2007 के नियमो के तहत पंजीयन होना आवश्यक है तो इसके लिए कोई अलग से ऑनलाइन या ऑफ लाइन प्लेटफार्म उपलब्ध है।