जयपुर

जयपुर के MNIT कैंपस में मिला लेपर्ड शावक का शव, शुरुआती रिपोर्ट में सामने आई ये बात

जयपुर के MNIT परिसर में 7-8 महीने के तेंदुए के शावक का शव मिला। मादा लेपर्ड पूजा के इलाके में शव मिलने के बाद वन विभाग ने पोस्टमार्टम कराया, जिससे मौत की वजह पता चल सके।
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Updated: 26 Oct 2026, 3:55 PM IST
Leopard Cub Found Dead
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जयपुर. जयपुर के एमएनआईटी परिसर के पीछे जंगल में मादा तेंदुए के शावक का शव मिला है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शावक की उम्र 7 से 8 महीने बताई जा रही है और साथ ही अभी तक मौत का कारण प्राकृतिक बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शावक का शव स्मृतिवन में रहने वाली मादा लेपर्ड पूजा के टेरिटरी क्षेत्र में मिला है। शावक का शव मिलने के बाद वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

झालाना का 'किंग' राणा एक महीने से लापता

इसके अलावा जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व का चर्चित तेंदुआ राणा पिछले एक महीने से लापता है। राणा को आखिरी बार 25 सितंबर 2026 को शाम की सफारी के दौरान देखा गया था। इसके बाद से उसकी कोई नई तस्वीर या झलक सामने नहीं आई है। 26 अक्टूबर तक उसे लापता हुए 31 दिन हो चुके हैं। वन विभाग की टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी हैं, लेकिन अब तक उसका पता नहीं चल पाया है।

राणा कोई आम तेंदुआ नहीं है। वह झालाना जंगल का डोमिनेंट मेल यानी प्रभावशाली नर तेंदुआ माना जाता है। पर्यटकों के बीच भी उसकी खास पहचान रही है। सफारी के दौरान वह अक्सर पर्यटकों की गाड़ियों के सामने आ जाता था और इंसानों या गाड़ियों से ज्यादा घबराता नहीं था। इसी वजह से उसे झालाना का 'हीरो' और 'किंग' भी कहा जाता है।

48 कैमरा ट्रैप से की जा रही तलाश

राणा को ढूंढने के लिए वन विभाग ने झालाना और आमागढ़ के जंगलों में करीब 48 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। ये कैमरे जंगल के उन रास्तों और पानी के स्रोतों के पास लगाए गए हैं, जहां तेंदुओं की आवाजाही होने की संभावना रहती है। इसके साथ ही वन विभाग की चार टीमें जंगल के अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

चित्तौड़गढ़ में तारों में फंसकर मादा लेपर्ड की मौत

वहीं, एक अन्य मामले में चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र के नाथू रामजी का खेड़ा गांव में खेत के चारों ओर लगी लोहे की जालीदार तारबंदी में फंसने से मादा लेपर्ड की मौत हो गई। रविवार सुबह करीब 9 बजे एक ग्रामीण ने लेपर्ड की दहाड़ और छटपटाने की आवाज सुनी। मौके पर पहुंचने पर वह तारों में बुरी तरह उलझी मिली। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। दोपहर करीब 12 बजे रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और लेपर्ड को तारों से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

Updated on:
26 Oct 2026, 3:55 PM IST
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