
रक्षा मंत्रालय ने राजस्थान समेत देशभर के 87 गैर-सैन्य स्टेशनों को 'हार्ड नॉन-मिलिट्री स्टेशन' (एचएनएमएस) की श्रेणी में शामिल किया है। इससे खासतौर पर राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और सैनिक स्कूलों में तैनात सशस्त्र बलों के कर्मियों को राहत मिलेगी। बता दें कि राजस्थान एक ऐसा राज्य है जिसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से सटी हुई है और इसका एक बहुत बड़ा भूभाग थार के रेगिस्तान तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में आता है।
आइए जानते हैं कि रक्षा मंत्रालय के इस नए सिस्टम से राजस्थान के सैन्य तंत्र, सैनिकों और उनके परिवारों को क्या-क्या बड़े लाभ मिलने जा रहे हैं।
राजस्थान में कई ऐसे सुदूरवर्ती और सामरिक क्षेत्र हैं जहां सेना की इकाइयां, एनसीसी (NCC) विंग्स या प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल (जैसे चित्तौड़गढ़ और झुंझुनू सैनिक स्कूल) संचालित हैं, लेकिन वहां कोई आधिकारिक बड़ी सैन्य छावनी नहीं है।
इन गैर-सैन्य स्टेशनों पर तैनात जवानों और अधिकारियों को मजबूरन नागरिक इलाकों में महंगे किराए पर मकान लेकर रहना पड़ता था, जहां पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं काफी सीमित थीं।
अब इन गैर-सैन्य स्टेशनों को 'हार्ड नॉन-मिलिट्री स्टेशन' (HNMS) की श्रेणी में शामिल किए जाने से राजस्थान के कठिन मरुस्थलीय और रेगिस्तानी इलाकों में ड्यूटी कर रहे कर्मियों की मुश्किलों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है।
राजस्थान के कई छोटे शहरों, कस्बों और सीमावर्ती चौकियों पर तैनात सशस्त्र बलों के जवानों को पहले सामान्य दरों के हिसाब से ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) मिलता था, जो महंगे होते लाइफस्टाइल और मकान के किरायों के सामने नाकाफी साबित होता था।
अब इन क्षेत्रों को 'हार्ड' श्रेणी में, यानी 'हार्ड नॉन-मिलिट्री स्टेशन' घोषित किए जाने के बाद राजस्थान में तैनात सैन्य कर्मियों को संशोधित और बढ़ी हुई दरों पर HRA मिलेगा। इससे सैनिकों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा।
राजस्थान के रेगिस्तानी या सरहद से सटे जिलों में पोस्टिंग के दौरान जवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की अच्छी शिक्षा और परिवार के स्वास्थ्य की होती थी, क्योंकि ऐसे छोटे स्टेशनों के आसपास बड़े मिलिट्री अस्पताल या केंद्रीय विद्यालय नहीं होते।
इस फैसले के तहत, राजस्थान के इन चिन्हित स्टेशनों पर ट्रांसफर होने वाले सैनिक अब अपने परिवार को उनकी पिछली सुरक्षित तैनाती (जैसे जयपुर, जोधपुर या अन्य बड़े महानगरों) पर ही छोड़ सकेंगे।
सरकार उनके परिवार के वहां रहने का खर्च यानी स्पेशल/सेपरेटेड फैमिली एकॉमोडेशन (SPA) भत्ता प्रदान करेगी। इससे जवान बिना किसी पारिवारिक मानसिक दबाव के अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी से निभा सकेंगे।
राजस्थान के युवाओं में भारतीय सेना के प्रति भारी क्रेज और देशभक्ति का जज्बा देखने को मिलता है। यही वजह है कि राज्य के लगभग हर जिले में एनसीसी की यूनिट्स और सैनिक स्कूल सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
सुविधाओं की कमी और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण पहले इनर इलाकों या सुदूर जिलों में पोस्टिंग को काफी कठिन माना जाता था।अब भत्ते, आवासीय सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं मिलने से सेना के बेहतरीन अधिकारी, प्रशिक्षक (Trainers) और जेसीओ (JCOs) स्वेच्छा से राजस्थान के इन संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के लिए आगे आएंगे, जिससे प्रदेश के युवा NCC कैडेट्स की ट्रेनिंग का स्तर और अधिक उन्नत होगा।
| श्रेणी / पहलू | पुरानी व्यवस्था (Old Rules) | नया बदलाव व राजस्थान एंगल (New System) |
| भौगोलिक स्थिति की मान्यता | सैन्य छावनी न होने के कारण नागरिक आबादी के बीच रहने की मजबूरी थी। | मरुस्थलीय एवं सुदूर भौगोलिक क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों को 'हार्ड श्रेणी' का आधिकारिक दर्जा मिला। |
| आर्थिक सहायता (HRA) | सामान्य श्रेणी के हिसाब से कम मकान किराया भत्ता मिलता था। | कर्मियों को संशोधित और बढ़ा हुआ मकान किराया भत्ता (HRA) मिलेगा। |
| परिवार का ठहराव | जवानों को या तो परिवार साथ रखना पड़ता था या अपने निजी खर्च पर अलग रखना पड़ता था। | परिवार को सुरक्षित और सुगम स्थानों पर रखने की छूट, जिसका खर्च SPA भत्ते के रूप में सरकार उठाएगी। |