
जयपुर। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से ठीक पहले 20 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर सरकार की रणनीति ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। सरकार के स्तर पर फिलहाल सत्र की केवल दो दिन बैठकें बुलाकर उसे स्थगित करने पर मंथन चल रहा है। इसके बाद पंचायत-निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के करीब तीन माह बाद नवंबर में विधानसभा की बैठकें फिर बुलाए जाने की संभावना है। करीब साढ़े पांच माह बाद शुरू होने वाला सत्र यदि दो दिन में ही निपटता है तो चुनावी माहौल में विपक्ष को सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने के लिए सदन में मौका कम ही मिलेगा।
राजस्थान सरकार की ओर से सत्र में ट्री एक्ट, यूसीसी और अन्य कुछ विधेयक लाने की तैयारी है। ऐसे में दो दिन की बैठक में विधायी कामकाज पूरा कराने की रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, पंचायत-निकाय चुनाव की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू होने की संभावना को सरकार सत्र स्थगित करने के तर्क के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है।
सरकार की ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की थीम के तहत पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने की तैयारी है। माना जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग 15 अगस्त के आसपास निकाय चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके साथ ही आचार संहिता लागू होने की स्थिति में सरकार के सामने नई घोषणाओं और नीतिगत फैसलों की सीमाएं होंगी। इसी परिस्थिति में दो दिन की बैठक के बाद विधानसभा को स्थगित कर चुनाव के बाद दोबारा बैठक बुलाने का रास्ता अपनाया जा सकता है। उसी समय फिर विधेयक पारित कराए जाएंगे। राजनीतिक तौर पर इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि पंचायत-निकाय चुनाव के बीच विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने और स्थानीय मुद्दों को सदन में उठाने का मौका नहीं मिलेगा।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मानसून सत्र को लेकर 18 अगस्त को सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान, आरएलडी विधायक डॉ. सुभाष गर्ग, बसपा विधायक मनोज कुमार और बीएपी विधायक थावर चंद को आमंत्रित किया गया है।
विधानसभा के षष्ठम सत्र और इसके बाद के अंतःसत्र काल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास मौजूद विभागों से जुड़े विधानसभा सवालों के जवाब और अन्य संसदीय कार्यों की जिम्मेदारी पांच मंत्रियों को सौंपी गई है। इनमें उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम शामिल हैं।
सर्वदलीय बैठक में हम सदन 15 से 20 दिन चलाने की बात रखेंगे। जिससे प्रदेश के छात्र, युवा, महिला, किसान, कानून व्यवस्था, बिजली, पानी, कर्मचारी, संविदाकर्मी, मजदूर, दलित, छात्रसंघ चुनाव और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक-एक दिन चर्चा हो सके। लेकिन सरकार दो-चार दिन बैठकें कर भागना चाहती है, यह ठीक नहीं।
-टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष
विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से शुरू हो रहा है। सत्र कितने दिन चलेगा, यह कार्य सलाहकार समिति तय करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की सत्र चलाने को लेकर पूरी तैयारी है।
-जोगाराम पटेल, संसदीय कार्य मंत्री
सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक में सभी दल चर्चा करेंगे। 20 अगस्त को शोकाभिव्यक्ति के बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक होगी और उसके निर्णय के अनुसार कार्यसूची तय होगी। उन्होंने कहा कि अभी सत्र चलाने के बाद इसे स्थगित किया जाएगा और पंचायत-निकाय चुनाव के बाद फिर बैठकें होंगी। सरकार कई विधेयक लेकर आ रही है।
-वासुदेव देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष