Mother's Day : आज मदर्स डे है। ऐसे में हमने उन मांओं से बात की, जिनके फौजी बच्चे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के हालात में सीमा पर तैनात हैं। इन मांओं ने जो कुछ कहा उसे सुनकर आपका सीना भी गर्व से फूल जाएगा। साथ ही कहेंगे कि मांंएं ऐसी ही होती हैं... पढ़ें मदर्स डे पर तीन मांओं से खास बातचीत।
Mother's Day : आज मदर्स डे है। ऐसे में हमने उन मांओं से बात की, जिनके फौजी बच्चे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के हालात में सीमा पर तैनात हैं। दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब दिया। आइए, इस मदर्स डे पर इन वीर माताओं के जज्बे को सलाम करें, जिनका प्यार और समर्पण देश की सीमाओं तक फैला है। भारत-पाकिस्तान में शनिवार शाम सीजफायर की घोषणा से पहले इन माताओं से पत्रिका की बातचीत हुई थी।
सीमा पर जो तनाव है, हालात देखकर डर भी लगता है, लेकिन देश की सुरक्षा और दुश्मन को जवाब देना भी जरूरी है। इसी काम में हमारे बच्चे लगे हैं। ये उन मांओं का कहना है, जिनके बच्चे फौज में हैं और वर्तमान हालात देखते हुए सीमा पर देश सेवा में जुटे हैं। ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के साथ ही ऐसे घरों के माहौल बदल गए। इन मां के दिलों में गर्व और चिंता का अनोखा संगम है। अपने बच्चे की चिंता सता रही है और गर्व इस बात है कि देश की हिफाजत में उनका लाल खड़ा है। यह उन मांओं का कहना है कि जिनके बेटा-बेटी पाकिस्तान से तनाव के बीच अलग-अलग सीमाओं पर रहकर देश सेवा कर रहे हैं।
1- जब भी फोन बजता है तो घर के सदस्य दौड़ के जाते फोन को उठाने।
2- परिजन और अन्य रिश्तेदार भी लेते रहते दिन में फोन करके जानकारी।
3- जहां पोस्टिंग वहां हालात बिगड़ने पर घर में फोन की घंटी बार-बार बजने लगती।
4- बातचीत के दौरान मां को मौजूदा हालात के बारे में नहीं देते कोई जानकारी।
नायक कुलदीप सिंह शेखावत अभी सीमा पर तैनात हैं। जिस जगह वो तैनात हैं, वहां तनाव ज्यादा है। यही वजह है कि कुलदीप की मां भंवर कंवर को चिंता रहती है। उनका ज्यादातर समय पूजा-पाठ में निकलता है। रिश्तेदारों के फोन आते हैं तो कम बात करती हैं। वे कहती हैं कि पहले की तरह अब बेटे से बात भी नहीं हो पा रही। कुलदीप मार्च में घर आया था और अप्रेल में लौट गया। पिता इन्द्र सिंह खुद फौज में रहे हैं। ऐसे में कुलदीप की मां को पूरी जानकारी देते हैं।
लेफ्टिनेंट कर्नल कुलदीप सिंह छिल्लर सप्ताह भर पहले ही छुट्टी बिताकर गए हैं। उनकी मांग रमेश देवी का कहना है कि हालात टेंशन वाले हैं। कुछ भी हो सकता है। ऐसे में बच्चे की चिंता तो सताती है। उन्होंने बताया कि जब स्थिति सामान्य थी तब कुलदीप सभी से बात करता था। अब नियमित रूप से बात नहीं कर पाता। कई बार फोन का जवाब भी नहीं देता। मैसेज करके ही छोड़ देता है। दिसम्बर, 2007 में वो एनडीए के जरिये भर्ती हुआ था।
झोटवाड़ा की रहने वाली लेफ्टिनेंट कर्नल दीपिका राठौड़ की मां संतोष कंवर का कहना है कि मेरी बेटी योद्धा है। देश के दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देना आता है। वह दो बार की एवरेस्ट विजेता रही है। कई सम्मान उसे मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि सदस्यों में किसी प्रकार का कोई डर नहीं है। दीपिका के बारे में उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यों में भी उसकी रुचि है। 13 अप्रेल को तीन दिन की छुट्टी लेकर जयपुर आई थी और राजपूत सभा भवन के चुनाव में मताधिकार का प्रयोग किया था।