कोविड काल में राजस्थान के कई नर्सिंग कॉलेज बिना इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) सूची में शामिल हुए संचालित हुए। अब इन कॉलेजों से पढ़े छात्रों को डिग्री निरर्थक लग रही है। आईएनसी मान्यता न होने से नौकरी और भर्ती अवसरों पर संकट खड़ा हो गया है।
जयपुर: कोविड महामारी के दौरान राजस्थान में कुछ नर्सिंग कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) की सूची में शामिल हुए बिना ही संचालित किए गए। उस समय तत्कालीन परिस्थितियों में कई कॉलेजों ने प्रवेश जारी रखा और सैकड़ों स्टूडेंट्स ने उसमें दाखिला ले लिया।
अब चार साल बाद जब ये विद्यार्थी बीएससी और जीएनएम नर्सिंग जैसे कोर्स पूरे कर बाहर निकले तो उन्हें अपने भविष्य पर संकट के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं। स्टूडेंट्स का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश के समय आईएनसी सूची को लेकर झूठी जानकारी दी। प्रदेश स्तर पर नर्सिंग काउंसिल की मान्यता होने का हवाला देकर एडमिशन कराया गया, लेकिन अब सामने आया है कि आईएनसी से अप्रूवल न होने के कारण उन्हें राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों में नौकरी नहीं मिल पाएगी।
विनायक नर्सिंग कॉलेज हाथोज के संचालक राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने कहा कि राजस्थान सरकार के अनुसार राजस्थान नर्सिंग काउंसिल ही मान्य होगी। फिर भी वे स्टूडेंट्स की मांग को देखते हुए व्यक्तिगत रूप से सरकार से आईएनसी की मान्यता का प्रयास करेंगे।
पिंकसिटी कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मण सिंह शेखावत ने कहा कि कोरोना काल के कारण आईएनसी की फाइल नहीं लगाई गई थी। क्योंकि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने दो साल के लिए आईएनसी को दरकिनार कर दिया था। साथ ही कॉलेज ने सूचना चस्पा की है कि शीघ्र ही कॉलेज का नाम आईएनसी की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
सिरसी रोड स्थित पिंकसिटी नर्सिंग कॉलेज और हाथोज में विनायक नर्सिंग कॉलेज के बाहर छात्र-छात्राओं ने आईएनसी की मान्यता नहीं होने के विरोध में प्रदर्शन किया। पिंकसिटी के छात्रों ने बताया कि साल 2019-20 और 2020-21 बैच के 100 से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश के समय कॉलेज ने धोखा दिया। ब्रोशर में बताया गया था कि संस्थान राजस्थान नर्सिंग काउंसिल और आईएनसी दोनों से मान्यता प्राप्त है। लेकिन कोर्स पूरा होने के बाद पता चला कि कॉलेज के पास केवल आरएनसी की मान्यता है।
वे अब केंद्र सरकार की भर्तियों में आवेदन नहीं कर सकते, जिससे उनके अवसर सीमित हो गए हैं। विनायक के स्टूडेंटस ने कहा कि प्रवेश के समय उन्हें 50 सीट आईएनसी से सूचीबद्ध होने के बारे में बताया गया। लेकिन सत्र 2020-21, 2021-22, 2023-24, 2024-25 में यहां की सीटें सूचीबद्ध ही नहीं हैं। इन कॉलेजों के स्टूडेंट्स ने उनके साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
कोर्स पूरा करने के बाद ठगा महसूस कर रहे स्टूडेंट्स ने पिछले दिनों धरना-प्रदर्शन किए। उनका कहना है कि चार साल की मेहनत और लाखों रुपए की फीस के बावजूद आज वे ‘निरर्थक डिग्री’ लेकर खड़े हैं। कुछ स्टूडेंट्स ने बताया कि भर्ती एजेंसियां और हॉस्पिटल इंटरव्यू के समय सीधे आईएनसी की सूची का हवाला देते हैं।
ऐसे में उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है। राजस्थान नर्सिंग काउंसिल से संबद्धता होने के बावजूद आईएनसी में सूचीबद्ध नहीं होने पर स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटका है।