कोरोना वैरिएंट में बदलाव के कारण फैसला
शालिनी अग्रवाल
जयपुर। तीन अरब से अधिक खुराक के बाद ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की ओर से कोविड वैक्सीन को वापस लिया जा रहा है। एस्ट्राजेनेका ने कहा कि उसे वैक्सीन पर "अविश्वसनीय रूप से गर्व" है, लेकिन उसने मांग में कमी को चलते वैक्सीन वापस लेने का फैसला किया है। कंपनी ने कहा है कि नए कोरोनोवायरस वेरिएंट के कारण अब टीकों में बदलाव करना पड़ रहा है, ऐसे में पुराने टीकों की मांग में कमी आई है। वैसे अनुमान लगाया गया था कि इसके टीके ने महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान बचाई, लेकिन दुर्लभ और कभी-कभी घातक रक्त के थक्के भी पैदा हुए।
रिकॉर्ड समय में बनी
दुनिया को महामारी लॉकडाउन से बाहर निकालने की दौड़ में, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा रिकॉर्ड समय में कोविड वैक्सीन विकसित की गई थी। जिस प्रक्रिया में आम तौर पर 10 साल लगते हैं, उसे घटाकर लगभग 10 महीने कर दिया गया। नवंबर 2020 में, इसे "दुनिया के लिए एक वैक्सीन" के रूप में घोषित किया गया था क्योंकि यह अन्य कोविड टीकों की तुलना में बहुत सस्ता और भंडारण में आसान था।
टीके के बारे में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एडम फिन ने कहा, "सच्चाई यह है कि इस टीके फाइजर व अन्य टीकों के साथ मिलकर हमें उस आपदा से बाहर निकाला जो उस समय सामने आ रही थी।" हालांकि, इसकी प्रतिष्ठा को धक्का लगा क्योंकि असामान्य रक्त के थक्के टीके के एक दुर्लभ दुष्प्रभाव के रूप में उभरे। प्रोफेसर फिन ने कहा: "मुझे लगता है कि वैक्सीन को वापस लेना यह दर्शाता है कि यह अब उपयोगी नहीं है।" उन्होंने कहा, "यह पता चला है कि यह वायरस बहुत तेज है और यह मूल टीकों से दूर विकसित हुआ है, इसलिए वे एक तरह से अप्रासंगिक हो गए हैं और अब केवल नए और बदलाव के साथ विकसित टीकों का उपयोग किए जाने की संभावना है।"