
जयपुर , जोधपुर।
हाईकोर्ट के दिए आदेश में साफ़ तौर पर कहा है कि फिल्म में राजपूती आन-बान-शान को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। कई महत्वपूर्ण वजह देते हुए हाईकोर्ट ने फिल्म के खिलाफ लगी एफआईआर निरस्त कर दी। ऐसे में अब एक बार फिर इस बात को लेकर चर्चा होने लगी है कि पहले सुप्रीम कोर्ट और अब हाईकोर्ट के हरी झंडी देने के बाद क्या फिल्म वितरक राजस्थान में इसे प्रदर्शित करने के लिए आगे आयेंगें। इस बीच करणी सेना संगठन ने फिल्म पर अपना विरोध जारी रखने के ऐलान को दोहराया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने फिल्म पद्मावत के निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण व अभिनेता रणवीरसिंह की ओर से सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर विविध आपराधिक याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ डीडवाना में दायर एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिए। हाईकोर्ट जज ने अपना फैसला सुनाते हुए फिल्म को प्रदर्शित किये जाने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने आदेश में ये 7 महत्वपूर्ण बातें कहीं-
1. फिल्म को सेंसर बोर्ड का प्रमाण पत्र मिल चुका है तथा सुप्रीम कोर्ट ने भी देशभर में फिल्म प्रदर्शित करने के आदेश दिए हैं। इसलिए राजस्थान में भी फिल्म पद्मावत दिखाने वाले सिनेमाघरों, दर्शकों सहित निर्माता, निर्देशक व कलाकारों को सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
2. शिकायतकर्ताओं के सभी आरोप आधारहीन
3. फिल्म के आरंभ में ही डिस्क्लेमर दिखाते हुए किसी तरह के विवाद से नहीं जुडऩे का प्रयास किया है।
4. फिल्म में न तो किसी की धार्मिक भावनाएं आहत होती है और न ही कोई एेसा संवाद है जिससे किसी तरह का वैमनस्य उत्पन्न होता हो।
5. फिल्म में पद्मावत के चरित्र चित्रण को लेकर उसके शौर्य, बहादुरी व जज्बे का जिक्र किया गया है।
6. फिल्म पद्मावती पर बनाई गई है, जो एेतिहासिक आइडॅल अर्थात महारानी थी। यदि वे देवी नहीं थी तो उसके चरित्र चित्रण से धार्मिक भावनाएं कहां आहत हुई?
7. किसी भी घटना का पूर्वानुमान लगा कर किसी पर आरोप लगाने से अपराध कैसे बन सकता है।
ये है मामला
गौरतलब है कि डीडवाना के शिकायतकर्ताओं वीरेंद्रसिंह व नागपाल सिंह ने आईपीसी की धाराओं 153 ए व 295 के तहत गत वर्ष फरवरी माह में एफआईआर दर्ज कराते हुए कहा था कि निर्माणाधीन फिल्म पदमावती के माध्यम से आरोपी भंसाली व अन्य लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काना व दो समुदायों में वैमनस्य फैलाना चाहते हैं। फिल्म में कई भद्दे दृश्य हैं व इतिहास के साथ छेड़छाड करने के प्रयास किए गए हैं। गौरतलब है कि कोर्ट के आदेश से कड़ी पुलिस सुरक्षा में हाईकोर्ट के लिए सोमवार रात फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
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