रेशु ने भावुक होते हुए बताया कि वे एक बेहद साधारण और गरीब परिवार से हैं। उनके सिर से पहले ही पिता का साया उठ चुका है, ऐसे में परिवार की आर्थिक और मानसिक जिम्मेदारियां पहले से ही काफी मुश्किल थीं। हादसे में उनके हाथ के साथ शरीर का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह झुलस गया, जिसकी जलन और दर्द आज भी उन्हें हर दिन महसूस होता है। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। अब उन्हें अपने इलाज के साथ-साथ भविष्य की भी चिंता सताती रहती है। पिता के न होने के कारण परिवार को संभालने की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। रेशु का कहना है कि उन्हें केवल सहानुभूति या आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि सरकार और प्रशासन से जमीन पर वास्तविक मदद, इलाज का पूरा खर्च और रोजगार चाहिए।