
मीडिया से बातचीत करते हुए रेशू गुप्ता
''अब आईने में अपना चेहरा नहीं, बिखरे हुए सपने दिखाई देते हैं। हर सुबह यही सोचकर आंख खुलती है कि परिवार का खर्च कैसे चलेगा।" यह कहना है महल रोड पर मोमोज का कार्ट लगाने वाली रेशु गुप्ता का, जिनकी जिंदगी 19 जून की शाम कुछ ही पलों में बदल गई। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के अकबरपुर से पांच साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में जयपुर आई रेशु ने बीएससी (मैथ्स) करने के बाद नौकरी की तलाश की। कई जगह काम किया, बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाई, लेकिन घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जब गया, तो हिम्मत जुटाकर खुद का मोमोज का कार्ट शुरू किया। कारोबार शुरू हुए अभी एक महीना ही हुआ था कि मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुई एक घटना ने सब कुछ उजाड़ दिया। हालांकि सरकार ने पीड़िता की उपचार की जिम्मेदारी लेते हुए डेयरी बूथ आवंटन की घोषणा कर दी।
शनिवार को प्रताप नगर स्थित व्यास अपार्टमेंट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेशु ने आरोप लगाया कि 19 जून की शाम वह रोजाना की तरह जगतपुरा के महल रोड पर कार्ट लगा रही थी। मोमोज के स्टीमर में पानी उबल रहा था। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी पहुंची और कार्ट हटाने के लिए कहा। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि गर्म पानी होने के कारण समय लगेगा, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद एक पुलिसकर्मी ने स्टीमर को धक्का दे दिया।
देखते ही देखते उबलता पानी उनके हाथ, छाती और जांघ पर गिर गया। इसके बाद वो दर्द से चीखती रहीं, लेकिन उनके अनुसार मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी बिना मदद किए चले गए। रेशु की बहन खुशबू गुप्ता उन्हें तत्काल निजी अस्पताल लेकर पहुंचीं।
रेशु का कहना है कि कुछ सामाजिक संस्थाओं और हजार रुपए की मदद जरूर की, लेकिन इलाज और घर का खर्च उससे कहीं ज्यादा है। वर्ष 2020 में पिता लाल बहादुर गुप्ता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी रेशु के कंधों पर आ गई थी। अब उनकी सबसे बड़ी चिंता इलाज नहीं, होकर जिंदगी शुरू करने की है।
परिजनों ने बताया कि चिकित्सकों के अनुसार रेशु गुप्ता का शरीर का करीष 20 प्रतिशत हिस्सा झुलस चुका है। पूरी तरह घाव भरने में ढाई महीने या उससे अधिक समय लग सकता है। हादसे ने सिर्फ शरीर नहीं, परिवार की आर्थिक रीढ़ भी तोड़ दी है। इलाज पर अब तक करीब 40 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। जिस कार्ट से पूरे परिवार का गुजारा चलता था, वह बंद पड़ा है। मकान किराए का है और आमदनी का कोई दूसरा जरिया नहीं बचा।
इस दर्दनाक घटना की जानकारी जैसे ही सरकार के उच्च स्तर पर पहुंची, प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई। पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
पुलिसकर्मी पर एक्शन: पुलिस विभाग ने शुरुआती जांच के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कर दी है।
कमिश्नर पहुंचे पीड़ित के घर: नगर निगम ग्रेटर के आयुक्त ओम कसेरा और उपायुक्त नीलम मीना स्वयं प्रताप नगर स्थित पीड़िता के किराए के मकान पर पहुंचे। अधिकारियों ने रेशू और उनके परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया।
सरकारी मदद का ऐलान: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेशू गुप्ता के इलाज का पूरा खर्च अब राज्य सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही परिवार को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक सहायता और एक पक्का डेयरी बूथ आवंटित करने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस घटना को लेकर जयपुर के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। शनिवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट सर्किल पर एकत्रित होकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
खाचरियावास ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। हादसे के बाद पीड़िता को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बजाय उसे तड़पता हुआ मौके पर ही छोड़ दिया गया।
विपक्ष ने मांग की है कि पीड़ित युवती को तुरंत उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए और जब तक डेयरी बूथ अलॉट नहीं होता, तब तक परिवार के भरण-पोषण की पूरी व्यवस्था सरकार करे।
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Updated on:
28 Jun 2026, 11:54 AM IST
Published on:
28 Jun 2026, 11:49 AM IST
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