राजस्थान पत्रिका के 70वें स्थापना दिवस पर उसके सात दशकों के सफर को भारतीय संस्कृति के ‘सात’ प्रतीक से जोड़ा गया। सत्य, जनविश्वास और जनसरोकारों के साथ पत्रिका ने निरंतर साहसिक पत्रकारिता की मिसाल पेश की। सामाजिक अभियानों, खोजी रिपोर्टिंग और जनहित के मुद्दों से पत्रिका ने व्यवस्था को आईना दिखाया और नीति बदलाव तक का मार्ग प्रशस्त किया।
Patrika Foundation Day: भारतीय संस्कृति में 'सात' एक संख्या मात्र नहीं, बल्कि विशालता और निरंतरता का प्रतीक है। जैसे सूर्य के सात घोड़े समय को गति देते हैं। सात चक्र मनुष्य की ऊर्जा को संतुलित करते हैं। सप्ताह के सात दिन निरंतर कर्म की याद दिलाते हैं। संगीत के सात सुर जीवन को राग देते हैं। इंद्रधनुष के सात रंग आशा का उजाला फैलाते हैं। सात समुद्र जीवन के विस्तार और गहराई का बोध कराते हैं। सप्तऋषि समाज को दिशा देते हैं।
राजस्थान पत्रिका की सत्तर वर्षों की यात्रा भी इसी सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी हुई यात्रा है। यह एक ऐसी यात्रा है, जो केवल अखबार की नहीं, बल्कि समाज के साथ किए गए संवाद की यात्रा है। पत्रिका की असली ताकत उसके पाठक हैं। वे ही उसकी पूंजी, प्रेरणा और उत्तरदायित्व हैं।
सात दशकों में पत्रिका ने जो साहस, विश्वास और सम्मान हासिल किया है, वो सब पाठकों के भरोसे से संभव हुआ। जब-जब सच को दबाने की कोशिश हुई, पत्रिका अकेले सच के साथ खड़ा रहा। खबरों से जब-जब सत्ता असहज हुई, पाठक पत्रिका के साथ खड़े रहे। यह बातें पत्रिका और पाठकों के रिश्ते की गहराई बताने के लिए पर्याप्त हैं। पत्रिका का सफर और पाठकों से रिश्ता साल दर साल ज्यादा मजबूत हुआ है।
पौराणिक मान्यता है कि सूर्य सात घोड़ों के साथ आकाश में चलता है। न रुकता है और न थकता है। राजस्थान पत्रिका की यात्रा भी सात दशकों में ऐसे ही आगे बढ़ी है। हर दशक ने समाज को नई ऊर्जा दी।
आपातकाल के दौर में खाली संपादकीय मौन नहीं, प्रतिरोध की सबसे मुखर आवाज थी तो 'जब तक काला, तब तक ताला' जैसे अभियान सत्ता की ड्योढ़ी पर झुकने से साफ इनकार था। मतदान जागरुकता अभियान का असर रहा है कि निर्वाचन विभाग ने मतदान तिथि बदली।
पत्रिका खबरों का नया संसार रच हर सुबह पाठक के दरवाजे पर दस्तक देता है और पढ़े जाने के बाद मन के दरवाजे खोलता है। निरंतरता और नयापन उसे पाठकों का सबसे विश्वसनीय साथी बनाता है।
मध्यप्रदेश में दशकों से ठप सरकारी बस सेवा को शुरू करवाने का मामला हो या जिला अस्पतालों में ब्लड बैंकों की लापरवाही से मरीजों के एचआईवी होने का मामला…पत्रिका की खबरों ने शासन-प्रशासन को सच्चाई का आईना दिखाया और जरूरी कदम उठाने पर मजबूर किया।
इंद्रधनुष सी रही है पत्रिका की यात्रा। लाल रंग साहसिक पत्रकारिता का प्रतीक है। नारंगी जन-जागरुकता अभियानों को दर्शाता है। नीला व हरा रंग जल संरक्षण और हरित प्रदेश की सोच को मजबूत करता है। पीला- जामुनी वैचारिक सृजन व बैंगनी नवाचार का विस्तार है। महिलाओं के मुद्दे पर टॉयलेट एक शर्म कथा व रामगढ़ बांध फिर जिंदा होगा जल स्रोतों का संरक्षण की मिसाल है।
शरीर के सात ऊर्जा व मानव चेतना के केंद्र माने जाते हैं। पत्रिका समाज की चेतना को संतुलित करने का कार्य करता है। यह जनविश्वास ही अन्याय के विरुद्ध ऊर्जा देता है। दूरदर्शी दृष्टि रखता है और जनचेतना से जुड़ा है। भोपाल में अयोध्या बाइपास के लिए पेड़ काटने का मामला हो या जगदलपुर में महंगी ओपीडी का मुद्दा सरकार को पर्यावरण व जनहित में फैसला करना पड़ा।
जैसे सात सुर मिलकर मधुर संगीत गढ़ते हैं, वैसे ही पत्रिका ने अपने सात मूल स्वरों से जनविश्वास की धुन रची है। सा, स्थापना से ही सच के साथ अडिग रहने का संकल्प है। रे, पाठकों से व रिश्ता है, जो हर संकट में और प्रगाढ़ हुआ। ग, राष्ट्रीय पुरस्कारों से अर्जित गौरव का प्रतीक है।
म, मार्गदर्शन और जन-जागरण का स्वर है जिसने सामाजिक अभियानों तक दिशा दी। प, परिवर्तन और संघर्ष का प्रतीक है। ध, धरोहर संरक्षण का भाव है। नि, नई ऊर्जा का संकेत है। मध्यप्रदेश में पत्रिका ने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता दी। तभी हुआ साइबर ठगी और मानव तस्करी पर कड़ा प्रहार व राजस्थान की तर्ज पर हर नागरिक को मिला आयुष्मान भवः का आशीर्वाद।
सप्तऋषि ज्ञान और दिशाबोध के प्रतीक माने जाते हैं। पत्रिका ने उसी भाव को आत्मसात किया है। समाज को दिशा देने के लिए पत्रिका संवाद ने हर ज्वलंत मुद्दे पर प्रश्न उठाए और समाधान की राह सुझाई। पत्रिका की खबरों पर शासन को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नेताओं के वाहनों पर अवैध हूटर हटाने की कार्रवाई करनी पड़ी।
वहीं, पवित्र नर्मदा के किनारे शराब दुकानें खोलने के मामले का खुलासा करने पर शराबबंदी जैसा सख्त कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। जनसरोकार की साधना और सत्य में आस्था। इन्हीं तत्वों ने पत्रिका को समाज का विश्वसनीय पथप्रदर्शक बनाया। पत्रिका की खबर नीति परिवर्तन का आधार बनती है तो जनमत को दिशा मिलती है।
समुद्र गहराई, विस्तार और अनंत संभावनाओं के प्रतीक हैं। ऐसे ही पत्रिका सतह से आगे बढ़कर मुद्दों की तह तक पहुंची है। व्यापक दृष्टि, दूरदर्शिता, जनजीवन से गहरा जुड़ाव, निष्पक्षता, संतुलित पड़ताल और सतत अनुसंधान- ये गुण इसकी पहचान बने।
बाड़मेर में रिफाइनरी लगाने के लिए देश को चाहिए कई ओर मंगला और साइबर ठगों और सट्टेबाजों के खिलाफ रक्षा कवच अभियान में हर विषय पर गंभीरता से तथ्य जुटाए गए। यह अभियान जिम्मेदार, खोजी और प्रभावी पत्रकारिता की गहराई को सिद्ध करने वाले रहे।
बालोतरा में अवैध जिप्सम खनन का मामला हो या सिरोही में स्वास्थ्य जांच सुविधाओं की कमी-रिपोर्टिंग सतह से आगे गई। हाईकोर्ट के निर्देश और सीएचसी प्रभारियों को नोटिस इसी गहराई का परिणाम हैं। व्यवस्थागत खामियों को उजागर कर सुधार की प्रक्रिया शुरू कराना खोजी पत्रकारिता की पहचान है।