Patrika Impact News: खबरों में जनसरोकार, तथ्य धारदार, असरदार...जनता के मुद्दों को सामने लाना, उनके समाधान का मार्ग सुझाना...यही पत्रिका की पहचान है। खबरों से अव्यवस्था का इलाज, मिली प्रभावितों को राहत, आज पढ़ें खबरों का चिकित्सा सेवा पर इम्पैक्ट...
Rajasthan Patrika Impact News: राजस्थान पत्रिका हमेशा से जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाला मंच रहा है। खासकर जब चिकित्सा व्यवस्था में गड़बड़ी या आमजन से जुड़ा मामला होता है तो पत्रिका की खबरें मामले की सारी परतें खोल कर रख देती हैं।
यही वजह है कि लोगों के बीच पत्रिका की खबर को जवाबदेही की आवाज माना जाता है। जब जनहित के मुद्दे मजबूती से उठाए जाते हैं तो व्यवस्था को बदलने के लिए कदम उठाने ही पड़ते हैं। इसलिए कहते हैं पत्रिका की खबर, कार्रवाई का आधार बनती है।
अभियानः राजस्थान पत्रिका ने आरजीएचएस में हो रही अनियमितताओं को उठाया।
जयपुर- आरजीएचएस में अनियमितताएं सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सीकर जिले के सात चिकित्सकों को निलंबित कर दिया। एक अस्पताल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जो मिलीभगत कर योजना में फर्जीवाड़ा कर रहे थे।
अजमेर- राजस्थान पत्रिका ने जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में उधार का इंटरनेट, छुट्टी के दिन बाधित होता इंटरनेट, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने अवकाश के दिन भी मोर्चरी की इंटरनेट सेवाएं जारी रखने के आदेश दिए।
बीकानेर- पत्रिका ने खुलासा किया कि बीकानेर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में रोगियों को जमीन पर सोना पड़ रहा है। खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने निर्णय लिया कि अस्पताल में किसी भी अवस्था में हर रोगी के लिए बेड उपलब्ध करवाया जाएगा।
चित्तौड़गढ़- पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल में दो चिकित्सकों को स्थाई रूप से और आठ चिकित्सकों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर लगाई गई। साथ ही अस्पताल में हर मर्ज के रोगियों के उपचार की व्यवस्था की गई, जिससे मरीजों को परेशानी नहीं हो।
जयपुर- राजस्थान पत्रिका ने आरजीएचएस स्कीम में लंबित भुगतान को लेकर खबर प्रकाशित की, जिसके बाद सरकार ने करीब 300 करोड़ रुपए जारी किए, जिससे मेडिकल स्टोर्स का भुगतान किया जा सके और पेंशनर्स को आरजीएचएस कार्ड पर दवा मिले।
कोटा- पत्रिका ने खबर प्रकाशित की थी कि सरकारी एंबुलेंसों के कंडम होने से मरीजों को निजी एंबुलेंस से मोटी रकम देकर अस्पताल जाना पड़ रहा है। जिसके बाद स्थायी लोक अदालत ने जिला कलक्टर और चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा।
अभियानः मरीजों की जांचें पूरी नहीं होने का मामला पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
पाली- पत्रिका की खबर के बाद विभाग के जिम्मेदार जागे। सरकार ने राज्य में मरीजों की जांच सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए हब एंड स्पॉक मॉडल लागू किया। इसके बाद जिस फर्म ने अब तक अस्पताल में जांच सुविधाएं शुरू नहीं की थी, वह भी हरकत में आई।