जयपुर

Patrika National Book Fair : ‘किताबें तनाव कम करने का सबसे अच्छा साधन, रोज डायरी लिखने की आदत डालें’

Patrika National Book Fair : जयपुर के जवाहर कला केंद्र में पत्रिका नेशनल बुक फेयर के पांचवें दिन बढ़ता तनाव-घटता सुकून पर चर्चा हुई। जिसमें कहा गया कि किताबें तनाव कम करने का सबसे अच्छा साधन, रोज डायरी लिखने की आदत डालें।

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Patrika National Book Fair Jaipur Fifth day Books are the best way to reduce stress
जयपुर के जवाहर कला केंद्र में पत्रिका नेशनल बुक फेयर का पांचवां दिन। फोटो पत्रिका

Patrika National Book Fair : जयपुर में बुक फेयर के पांचवें दिन बुधवार को बढ़ता तनाव-घटता सुकून पर चर्चा हुई। जिसमें वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ललित बत्रा, साइकोलॉजिस्ट अनामिका पापड़ीवाल ने हर उम्र वर्ग में बढ़ रहे तनाव पर चर्चा की। सत्र में डॉ. ललित बत्रा ने बताया कि आधुनिक जीवन में इंसान के लिए स्पीड, कनेक्टिविटी और प्रेशर यह तीनों चीजें सबसे प्रमुख हो गई हैं। इनके कारण व्यक्ति की भागदौड़ और लालसा बढ़ गई है।

साथ ही, इसके अलावा मोबाइल एडिक्शन एवं वर्क प्रेशर भी तनाव बढ़ाने के प्रमुख कारणों में शामिल है, जिसके कारण हम व्यवहारिक, सामाजिक और हेल्दी लाइफ नहीं जी पा रहे हैं। उन्होंने बच्चों में बढ़ते तनाव को रोकने के लिए उनमें स्पोर्ट्स की ओर रूझान बढ़ाने की जरूरत बताई। साथ ही कहा कि किताबें तनाव कम करने का सबसे अच्छा साधन, रोज डायरी लिखने की आदत डालें।

छोटी चीजों से बढ़ता तनाव

सत्र में साइकोलॉजिस्ट अनामिका पापड़ीवाल ने कहा कि हम जिन छोटी-छोटी चीजों को इग्नोर करते रहते हैं, वे एकत्र होकर एंग्जायटी और तनाव बढ़ाने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि हम आसपास की बजाय दूर तक देखते हैं, यह भी तनाव बढ़ने की एक अहम वजह है। किसी के अभाव न प्रभाव में जीयो, जिंदगी अपने स्वभाव में जीयो और तनाव से दूर रहो।

बच्चों के खत की पहल को मिली सराहना

साइकोलॉजिस्ट अनामिका पापड़ीवाल ने पत्रिका के बाल दिवस पर प्रकाशित खबर की सराहना करते हुए कहा कि सभी स्कूलों में बच्चों को अपने मन की बात भगवान को कहने की पहल शुरू करनी चाहिए। परिजनों को बच्चों से खुलकर बात करने और उन्हें समय देने की भी अपील की।

राजस्थान पत्रिका की वरिष्ठ पत्रकार अर्चना कुमावत ने लोगों में बढ़ रहा तनाव, चिंता, एंग्जायटी समेत अन्य मानसिक समस्याओं पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने बताया कि राजस्थान पत्रिका मानसिक स्वास्थ्य को किसी एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि जागरूकता के निरंतर प्रयास के रूप में लेता है। इस सत्र का मॉडरेशन राजस्थान पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार चांद मोहम्मद शेख ने किया।