
जयपुर। पिंक सिटी जयपुर सहित राजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बंदरों का आतंक अब एक गंभीर संकट बन चुका है। विधानसभा में शाहपुरा विधायक मनीष यादव ने जब इस मुद्दे को उठाया, तो स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खरा ने विस्तार से जवाब देते हुए इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक और पारिस्थितिक कारणों को सदन के सामने रखा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि मानवीय हस्तक्षेप और जंगलों में बढ़ती हलचल ने बंदरों को शहरों की ओर पलायन करने पर मजबूर कर दिया है।
मंत्री झाबर सिंह खरा ने जीव विज्ञान का हवाला देते हुए कहा कि लाल मुँह के बंदर और हनुमान लंगूर मानव के पूर्वज माने जाते हैं। उन्होंने पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए कहा, "आज से 50-60 साल पहले बच्चों को बंदर दिखाने के लिए मदारी साल में दो-चार बार आता था, लेकिन आज परिस्थितियां बदल गई हैं। अब ये हमारे पूर्वज इतने 'उच्छृंखल' हो गए हैं कि रसोई में घुसकर बर्तनों की तोड़फोड़ करना, कपड़े फाड़ना और बच्चों-बुजुर्गों पर हमला करना आम बात हो गई है।"
मंत्री ने बताया कि जयपुर का गलता जी, सामोद के वीर हनुमान मंदिर, सरिस्का और सवाई माधोपुर के गणेश मंदिर बंदरों के मूल निवास स्थान रहे हैं।
सदन में शाहपुरा तहसील का डेटा रखते हुए मंत्री ने बताया कि साल 2019 से अब तक हजारों बंदरों को पकड़ा जा चुका है:
सदन में चर्चा के दौरान एक बड़ा खुलासा यह हुआ कि बंदरों की समस्या का समाधान किस विभाग की जिम्मेदारी है, इसे लेकर भ्रम की स्थिति है।
जयपुर के संजय वन (अब श्री अटल वन) में बंदरों के पुनर्वास के लिए कई कदम उठाए गए हैं:
मंत्री खरा ने सदन में सभी विधायकों से लिखित सुझाव मांगे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि समस्या इतनी व्यापक है कि इसे पूरी तरह हल करना मुश्किल है, लेकिन सतत पकड़-धकड़ और वन क्षेत्रों में भोजन की व्यवस्था कर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
Published on:
23 Feb 2026 04:18 pm
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