देश के दो बड़े विपक्षी नेताओं ने सीधे केंद्रीय मंत्री का दरवाजा खटखटाया। यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि राजस्थान के हजारों परिवारों के रोजगार और सड़क सुरक्षा से जुड़े गंभीर तकनीकी सवालों का जवाब खोजने की एक कोशिश थी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से संसद भवन में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक राजस्थान के बस एवं ट्रक बॉडी बिल्डर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को लेकर की गई थी। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु हाल के दिनों में स्लीपर बसों में लगने वाली आग की घटनाएं और केंद्र सरकार द्वारा बॉडी निर्माण को लेकर जारी किए गए नए कड़े नियम रहे।
मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने सड़क सुरक्षा के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए सीधे केंद्रीय मंत्री से पूछा कि देशभर में, विशेषकर राजस्थान से चलने वाली स्लीपर बसों में आग लगने की इतनी घटनाएं क्यों हो रही हैं? उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और बॉडी बिल्डर्स की तकनीकी दिक्कतों को गडकरी के सामने रखा।
राहुल गांधी के सवाल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विस्तार से तकनीकी पक्ष रखा। गडकरी ने बताया कि समस्याओं की जड़ यह है कि बसों की बॉडी अलग से बनाई जा रही है और चेसिस पुराने इस्तेमाल हो रहे हैं। इस असंतुलन के कारण बसों में तकनीकी खराबी आती है जो अक्सर आग लगने का कारण बनती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी जोखिम को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बॉडी निर्माण के नियमों में बदलाव के आदेश जारी किए हैं।
राजस्थान का बस और ट्रक बॉडी बिल्डिंग उद्योग देश में अपनी पहचान रखता है। हाल ही में सरकार द्वारा जारी नए नियमों के कारण इस उद्योग से जुड़े हजारों उद्यमियों और कारीगरों के सामने तकनीकी और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस डेलिगेशन का नेतृत्व करते हुए राजस्थान के परिवहन क्षेत्र की चुनौतियों को रेखांकित किया। बैठक में राजस्थान के आरटीओ बस पंजीकरण प्रक्रिया में आ रही जटिलताओं पर भी चर्चा हुई, जो सीधे तौर पर प्रदेश के ट्रांसपोर्ट बिजनेस को प्रभावित कर रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि मंत्रालय राजस्थान के बॉडी बिल्डर्स की मांगों पर विचार कर सकता है। गडकरी ने आश्वासन दिया कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यात्रियों की जान बचाना है, लेकिन वह उद्योग की जायज समस्याओं को भी अनदेखा नहीं करेंगे।