
राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए एसीबी की टीम ने अलवर के गोविंदगढ़ तहसीलदार बसंत कुमार परसोया और उनके दलाल रवि उर्फ रिंकू को गिरफ्तार किया है। मामला जमीन के नामांतरण (इन्द्राज) के बदले 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़ा है। एसीबी ने दलाल को रिश्वत की पहली किस्त लेते रंगे हाथों पकड़ा, जिसके बाद तहसीलदार को भी हिरासत में ले लिया गया।
यह पूरा विवाद करीब 2 बीघा जमीन को लेकर था, जिसकी बाजार कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई जा रही है। परिवादी ने शिकायत दी थी कि उसे अपनी ताई के हिस्से की जमीन अपने नाम करानी थी। पटवारी और सरपंच ने फाइल आगे बढ़ा दी थी, लेकिन तहसीलदार बसंत कुमार ने फाइल रोक ली और दलाल के माध्यम से 5 लाख रुपये की मांग की।
एसीबी की जांच में सामने आया कि तहसीलदार खुद भ्रष्टाचार के इस खेल में सीधे तौर पर शामिल था।
शुरुआत में 5 लाख रुपये मांगे गए थे, लेकिन बाद में सौदा 3 लाख 50 हजार रुपये पर तय हुआ। 13 मार्च 2026 को एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। सोमवार को जैसे ही दलाल रवि उर्फ रिंकू ने पहली किस्त के रूप में डेढ़ लाख रुपये (1,50,000) लिए, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके तुरंत बाद तहसीलदार बसंत कुमार परसोया को भी तहसील कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया गया।
यह पूरी कार्रवाई एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन और उप महानिरीक्षक (चतुर्थ) अनिल कयाल के निर्देशन में की गई। अलवर प्रथम की एसीबी टीम, जिसका नेतृत्व उप अधीक्षक शब्बीर खान कर रहे थे, ने इस सफल ट्रैप को अंजाम दिया। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है।
एक तरफ राजस्थान सरकार राजस्व मामलों को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रियाओं पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर तहसीलदारों द्वारा फाइलों को रोककर दलालों के जरिए वसूली करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, वह कानून की नजर से नहीं बच सकता।
Updated on:
18 Mar 2026 10:51 am
Published on:
18 Mar 2026 10:51 am
