
Ashok Gehlot : गांधी सागर बांध से रामगंजमंडी क्षेत्र की सीमावर्ती गांवों तक नहरी पानी पहुंचने का सपना 2 साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाया है विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों के बाद परियोजना को लेकर हलचल शुरू हुई लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच अंतर राज्य सहमति न बनने से मामला अभी आगे नहीं बढ़ सका है। इस मामले पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वादे करना और उन्हें नहीं निभाना भाजपा की आदत है। 2028 के चुनाव में जनता इसका हिसाब मांगेगी और जवाब देगी।
अशोक गहलोत इस मुद्दे पर सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि भाजपा ने राजस्थान के विधानसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि रेवा सिंचाई परियोजना (मध्य प्रदेश) की तर्ज पर गांधी सागर से राजस्थान के सीमावर्ती गांवों तक भी नहर से पानी पहुंचाया जाएगा। दो साल बाद भी यह परियोजना कागजों में है, न दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी, न डीपीआर को मंजूरी मिली। उम्मीद थी कि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार होने से काम तेज़ी से होगा, पर डबल इंजन की सरकार दो साल में एक अंतरराज्यीय सहमति तक नहीं बना पाई।
अशोक गहलोत ने कहा कि अब यमुना जल समझौते का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जिसमें 33 हजार करोड़ रुपए से ज़्यादा की परियोजना, हरियाणा में ज़मीन अधिग्रहण, अलग कंपनी का गठन और केंद्र से धन की मंजूरी, सब अभी बाकी है। गांधी सागर का यह हाल देखकर डर लगता है कि यमुना का पानी भी शेखावाटी तक कागजों में ही बहता रह जाएगा।
अशोक गहलोत ने कहा कि यमुना जल समझौते के होर्डिंग हर जगह लग रहे हैं और उन पर पैसा खर्च किया जा रहा है। जनता भी सोच रही है कि झूठे प्रचार की भी हद होती है। कितनी बार यमुना के नाम पर विज्ञापन दिए गए, कितनी बार फोटो सेशन करवाए गए, पर तीन साल में एक जगह भी काम शुरू नहीं हुआ। वादे करना और उन्हें नहीं निभाना भाजपा की आदत है। 2028 के चुनाव में जनता इसका हिसाब मांगेगी और जवाब देगी।