जयपुर

Rajasthan Assembly : राजस्थान में एडीएम की अनुमति से बिकेगी अशांत क्षेत्र में संपत्ति, डिस्टर्ब एरिया बिल 2026 पारित

Rajasthan Assembly : राजस्थान विधानसभा ने शुक्रवार को ‘दी राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेन्ट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026' पारित कर दिया है। डिस्टर्ब एरिया बिल 2026 के तहत राज्य सरकार दंगा या सांप्रदायिक तनाव वाले क्षेत्रों को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेगी।

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ग्राफिक्स फोटो पत्रिका

Rajasthan Assembly : राजस्थान विधानसभा ने अशांत क्षेत्रों में दबाव में संपत्ति बेचने की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिबंध एवं परिसरों से किराएदारों को बेदखली से संरक्षण उपबंध विधेयक-2026 पारित कर दिया। विधेयक पर करीब साढ़े चार घंटे चर्चा हुई।

बहस का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि विधेयक में हिन्दू, मुस्लिम, बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक, समुदाय या पूजा पद्धति का कहीं उल्लेख नहीं है। यह कानून सामाजिक न्याय, सुरक्षा और संवैधानिक संतुलन को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

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मॉनिटरिंग और सलाहकार समिति बनाई जाएगी

मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि किसी क्षेत्र को तभी अशांत क्षेत्र घोषित किया जाएगा जब वहां दंगे या गंभीर साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति बने। उन्होंने कहा कि जोधपुर में ऐसा भी क्षेत्र हैं जहां कोई घुस नहीं सकता।

राजस्थान में ऐसे क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। डिस्टर्ब एरिया के अध्ययन के लिए मॉनिटरिंग और सलाहकार समिति बनाई जाएगी। समिति में एक अध्यक्ष और सरकार की ओर से तय सदस्य होंगे।

पलायन को रोकने में मददगार होगा यह कानून

जोगाराम पटेल ने कहा कि साम्प्रदायिक तनाव या हिंसा के बाद भय और सामाजिक दबाव के कारण कई लोग अपनी संपत्ति वास्तविक मूल्य से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं। यह कानून ऐसे लोगों के पलायन को रोकने और संपत्ति का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

प्रशासनिक रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर किसी क्षेत्र, कॉलोनी या वार्ड को विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित किया जा सकेगा। यह अधिसूचना तीन वर्ष के लिए होगी, जिसे घटाया और बढ़ाया जा सकेगा।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

1- विक्षुब्ध क्षेत्र में एडीएम की अनुमति के बिना बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति हस्तांतरण नहीं होगा और रजिस्ट्री भी नहीं की जाएगी।
2- बिना अनुमति संपत्ति हस्तांतरण अमान्य माना जाएगा।
3- समुदाय विशेष की डेमोग्राफी प्रभावित होना भी डिस्टर्ब एरिया का आधार।
4- संपत्ति बेचान प्रार्थना पत्र पर एसडीएम करेगा तीन महीने में फैसला।
5- अपराध गैर जमानती व संज्ञेय, 3 से 5 साल तक जेल और 1 लाख तक जुर्माना भी।
6- बैंकों और वितीय संस्थानों के पास गिरवी संपत्ति पर लागू नहीं, नीलामी भी संभव।
7- प्रावधानों के उल्लंघन या समुदाय विशेष के विस्थापन के प्रयास पर संपत्ति बेचान प्रार्थना पत्र निरस्त।

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Published on:
07 Mar 2026 09:39 am
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