भाजपा विधायक कल्याण सिंह चौहान का निधन भाजपा के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है।
जयपुर। राजस्थान की नाथद्वारा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कल्याण सिंह चौहान का बुधवार काे निधन हाे गया। नाथद्वारा से दूसरी बार विधायक रहे कल्याण सिंह साल 2008 में कांग्रेस के दिग्गज नेता सीपी जोशी को मात्र 1 वोट से चुनाव हराकर उनसे मुख्यमंत्री की कुर्सी खींच ली थी।
एेसे में आगामी विधानसभा चुनावाें काे देखते हुए सिंह का निधन भाजपा के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। आपकाे बता दें कि पिछले कुछ महीनाें में कर्इ वरिष्ठ नेताआें के निधन से भाजपा का जातीय समीकरण भी बिगड़ता नजर आ रहा है। सांसद सांवरलाट जाट, महंत चांदनाथ आैर विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के बाद रिक्त सीटाें पर हुए उपचुनावाें में भाजपा काे सभी सीटाें पर हार का मुंह देखना पड़ा।
मालूम हाे कि भरतपुर—धौलपुर में जाट राजनीति में पैठ रखने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ.दिगंबर सिंह के निधन से राजस्थान में भाजपा को जबरदस्त धक्का लगा है। वे बीसूका के भी उपाध्यक्ष थे। कैंसर की बीमारी के कारण उनका निधन हो गया था। राजनीति के जानकारों के अनुसार, डॉ.सिंह के निधन से भरतपुर समेत डांग क्षेत्र में भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इससे पहले अजमेर से सांसद प्रो. सांवरलाल जाट के निधन से भी भाजपा को बड़ा झटका लगा। उनके निधन के बाद खाली हुर्इ सीट पर उनके बेटे रामस्वरुप लांबा काे चुनावी मैदान में उतारा गया। लेकिन वे कांग्रेस उम्मीदवार रघु शर्मा से हार गए। सांवरलाल जाट का प्रभाव किसान और जाटों में था। अलवर से सांसद महंत चांदनाथ के निधन के बाद यहां भी भाजपा काे हार का सामना करना पड़ा। अलवर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार करण सिंह यादव ने भाजपा के जसवंत सिंह यादव को हरा दिया।
इसी तरह भीलवाड़ा के मांडलगढ़ से विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के बाद मांडलगढ़ सीट भी भाजपा से कांग्रेस ने छीन ली। मांडलगढ़ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार विवेक धाकड़ ने भाजपा के शक्ति सिंह हाड़ा को हराया। राजस्थान खादी बोर्ड के चेयरमैन शंभूराम बड़गुजर के निधन से भी भाजपा को सदमा लगा।
क्या रहेगाी कांग्रेस आैर भाजपा की रणनीति?
राजस्थान में हाेने वाले विधानसभा चुनावाें काे देखते हुए कांग्रेस ने किसी भी तरह की गुटबाजी काे राेकने के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का एेलान किया है। पार्टी की आेर से कहा गया है कि पार्टी की आेर से सीएम पद का काेर्इ दावेदार नहीं हाेगा। वहीं भाजपा ने पिछले चुनावाें में पूरी ताकत लगार्इ थी इसके बावजूद हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के लिए मुसीबत भरी बात यह भी है कि यहां एंटी वसुंधरा की लहर दाैड़ पड़ी है। अब देखना हाेगा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए क्या नया फाॅर्मूला अपनाती है।