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Rajasthan Politics : किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल ने शेयर किए ‘थ्रो बैक’ वीडियो, जानें क्यों दोनों दिग्गजों को अचानक याद आई अपनी पुरानी हुंकार?

राजस्थान की राजनीति के दो दिग्गज चेहरों, कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और सांसद हनुमान बेनीवाल ने अचानक अपने संसद के पुराने वीडियो (Throwback Videos) शेयर कर प्रदेश में हलचल मचा दी है।

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Dr Kirodi Lal Meena and Hanuman Beniwal - File PIC

Dr Kirodi Lal Meena and Hanuman Beniwal - File PIC

राजस्थान की राजनीति में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। आज सोशल मीडिया पर दो ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिन्होंने एक बार फिर राजस्थान से लेकर दिल्ली तक 'गौ संरक्षण' की बहस को तेज कर दिया है। ये वीडियो हैं, भजनलाल सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के। दोनों नेताओं ने अपने-अपने फेसबुक और एक्स (ट्विटर) हैंडल पर संसद में दिए गए पुराने भाषणों के अंश साझा किए हैं।

खास बात यह है कि दोनों ही वीडियो में 'गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा' देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है, जो राजस्थान के ग्रामीण और धार्मिक मतदाताओं के बीच एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है।

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा: 'गाय आस्था है, केवल पशु नहीं'

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 6 दिसंबर 2023 का अपना राज्यसभा का वीडियो साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा:

  • करोड़ों की आस्था: किरोड़ी लाल के अनुसार, गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देना केवल एक सरकारी प्रस्ताव नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन मूल्यों का सम्मान है।
  • गौ सम्मान आह्वान: उन्होंने देशभर में चल रहे "गौ सम्मान आह्वान अभियान" को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए इसे सनातन परंपराओं का गौरव बताया।
  • ममता का स्वरूप: बाबा (किरोड़ी लाल) ने कहा कि गाय की ममता में माँ का स्वरूप झलकता है और वह भारतीय जीवन के हर आयाम से जुड़ी है।

हनुमान बेनीवाल: 'टाइगर के लिए रिजर्व, तो गाय के लिए क्यों नहीं?'

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने 2 अगस्त 2022 का अपना लोकसभा वीडियो शेयर कर सीधे सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। बेनीवाल ने अपनी पोस्ट में वीर तेजाजी महाराज का जिक्र करते हुए लिखा:

  1. लम्पी बीमारी का दर्द: बेनीवाल ने याद दिलाया कि 2022 में जब उन्होंने यह मांग उठाई थी, तब राजस्थान लम्पी बीमारी की विभीषिका झेल रहा था।
  2. गौ अभयारण्य की मांग: उन्होंने सदन में तर्क दिया था कि जब देश में टाइगर रिजर्व के लिए विशेष प्रावधान हो सकते हैं, तो गायों के लिए 'गौ अभयारण्य' और संरक्षित गौचर भूमि का विकास क्यों नहीं हो सकता?
  3. सियासी हमला: बेनीवाल ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार गाय के नाम पर वोट तो लेती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाती है।

राजस्थान की राजनीति में इसके क्या मायने हैं?

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन पुराने वीडियो को अब शेयर करने के पीछे कई बड़े संकेत हैं:

  • वोट बैंक की गोलबंदी: राजस्थान में गाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़े हैं। दोनों नेता अपनी छवि को 'गौ भक्त' और 'किसान हितैषी' के रूप में और मजबूत करना चाहते हैं।
  • तेजाजी महाराज की प्रेरणा: बेनीवाल द्वारा तेजाजी महाराज का जिक्र करना सीधे तौर पर जाट समुदाय और ग्रामीण वर्ग की भावनाओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश है।
  • मुद्दों की राजनीति: किरोड़ी लाल मीणा का 'सनातन' और बेनीवाल का 'अधिकार' वाला रुख राजस्थान में आगामी राजनीतिक बिसात की ओर इशारा कर रहा है।