छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में बीते मंगलवार को सुनवाई हुई। वहीं आगामी एक अगस्त को याचिका पर अगली सुनवाई होनी है।
Student Union Elections in Rajasthan: राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों की बहाली को लेकर आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। पिछले दो वर्षों से राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगी हुई है। जिसके विरोध में जयपुर समेत प्रदेश के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्र संगठन आंदोलनरत दिए हैं। छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में बीते मंगलवार को सुनवाई हुई। वहीं आगामी एक अगस्त को याचिका पर अगली सुनवाई होनी है।
वर्ष 2023 में उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, प्रवेश प्रक्रिया में देरी और 180 दिन के अध्यापन की अनिवार्यता का हवाला देते हुए चुनाव स्थगित किए थे। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन याचिका खारिज हो गई। लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट में अब फिर से छात्रसंघ चुनावों को लेकर याचिका लगाई , जिस पर बीते मंगलवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं एक अगस्त को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लेेकर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई होगी। छात्र संगठन आगामी 4 अगस्त को जयपुर में विधानसभा घेराव की तैयारी की रणनीति बना रहे हैं।
इधर, छात्र संगठन एनएसयूआई, एबीवीपी और SFI इस मुद्दे पर एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। जयपुर में छात्र नेताओं जैसे अभिषेक चौधरी, शुभम रेवाड़ और आलोक वर्मा ने अनोखे प्रदर्शन किए, जिसमें प्रतीकात्मक मतपेटियां, नेताओं के कट-आउट और लोकतंत्र की विदाई जैसे प्रदर्शन शामिल थे।
जोधपुर में अभिषेक चौधरी और महेंद्र चौधरी ने छात्र चेतना यात्रा निकाली, जिसमें छात्रों ने भगवान, गांधी, और रानी लक्ष्मीबाई के वेश में जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली। कुछ छात्रों ने राजस्थान विश्वविद्यालय में जल समाधि और सदबुद्धि यज्ञ जैसे अनोखे विरोध प्रदर्शन किए। छात्र नेताओं का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव न केवल छात्र हितों की रक्षा करते हैं, बल्कि युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करते हैं।
वर्ष 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगा दी थी। तर्क दिया गया कि इन चुनावों में भारी धनबल और बाहुबल का उपयोग हो रहा है। साथ ही लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन और परिसरों में हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि ये चुनाव विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह महंगे और अनुशासित हो गए हैं।