राज्यसभा में राजस्थान भाजपा के नाम नया रिकार्डराजस्थान के कोटे की सभी दस राज्यसभा सीटों पर अब भाजपा का कब्जा
जयपुर। राज्यसभा में राजस्थान भाजपा के नाम नया रिकार्ड बन गया है। राजस्थान के कोटे की सभी दस राज्यसभा सीटों पर अब भाजपा का कब्जा है होगया है। राज्यसभा में राजस्थान के नवनिर्वाचित तीनों सदस्य भाजपा महासचिव भूपेन्द्र यादव ,डॉ.किरोड़ीलाल मीणा और मदनलाल सैनी ने ली आज सेवरे 11 बजे शपथ ली। इसके बाद अब राजस्थान के सभी 10 राज्यसभा सदस्य भाजपा के हो गए है। पहले से मौजूद सात सदस्य भी भाजपा के राजस्थान से भाजपा के ओमप्रकाश माथुर,विजय गोयल ,नारायणराम पंचारियां,के.जी.अल्फोंस , हर्षवर्धन सिंह और रामकुमार वर्मा है रामनारायण डूडी शामिल है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव को होगा यह दूसरा कार्यकाल होगा। प्रदेश की जिन तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए है यह सीट कांग्रेस के अभिषेक मनुसिंघवी नरेन्द्र बुढ़ानिया और भूपेन्द्र यादव का कार्यकाल खत्म होने के कारण खाली हुई है। तीनों ही सीटों पर प्रत्याशियों का निर्वाचन निर्विरोध हुआ है। ऐसा पहली बार होगा कि प्रदेश से राज्यसभा सांसदों में किसी भी कांग्रेस सांसद का नाम शुमार नहीं हो।
विधानसभा चुनाव की इंजीनियरिंग कवायद से दिए टिकट
राज्यसभा की तीनों सीटों के लिए नामों का चयन करते समय भाजपा ने आगामी 8 माह बाद होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के लिहाज से जातीय समीकरणों को पूरी तरह से साधने की कोशिश की है । भूपेन्द्र यादव भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री है । हाल ही में सम्पन्न् यादव बाहुल्य अलवर संसदीय सीट के उप चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की करीब 2 लाख वोटों से हार के बाद भूपेन्द्र यादव को राज्यसभा में भेजकर पार्टी ने यादव मतदाताओं को साधने का प्रयास किया है ।
राजपा की प्रदेश इकाई का दो तिहाई बहुमत से रविवार को विलय करने वाले डॉ.किरोड़ी लाल मीणा को राज्यसभा में भेजकर भाजपा ने आधा दर्जन जिलों की करीब 45 विधानसभा सीटों को साधने का प्रयास किया है । इन सीटों पर किरोड़ी लाल मीणा का प्रभाव है । करीब 10 वर्ष पूर्व भाजपा से अलग होकर राजपा में शामिल होने वाले किरोड़ी लाल मीणा ने पिछले विधानसभा चुनाव में 60 सीटों पर राजपा के प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया था ।
इनमें 4 सीटों पर तो राजपा प्रत्याशी जीते और 35 सीटों पर राजपा प्रत्याशियों ने 5 से 40 हजार तक वोट लिए । तीसरे उम्मीदवार मदनलाल सैनी का नाम तय करने का मकसद कार्यकर्ताओं और संघ के स्वयंसेवकों में संदेश देने का रहा है । सैनी आएसएस के पुराने स्वयंसेवक होने के साथ ही दो बार झुंझुंनू लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके और एक बार विधायक भी रहे हैं ।