सांसद हनुमान बेनीवाल ने बजट से ऐन पहले मुख्यमंत्री को 10 ऐसी मांगों की सूची सौंपी है, जो सीधे तौर पर आम जनता के जेब और विकास से जुड़ी हैं। बेनीवाल ने साफ कर दिया है कि अगर बजट में इन मांगों की अनदेखी हुई, तो इसे जनता के साथ अन्याय माना जाएगा।
जयपुर/नागौर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपना तीसरा बजट पेश करने जा रहे हैं, लेकिन इस बार बजट की गूँज विधानसभा से पहले सोशल मीडिया और गलियारों में सुनाई दे रही है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने बजट से ऐन पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 10 ऐसी मांगों की सूची सौंपी है, जो सीधे तौर पर आम जनता के जेब और विकास से जुड़ी हैं। बेनीवाल ने साफ कर दिया है कि अगर बजट में इन मांगों की अनदेखी हुई, तो इसे जनता के साथ अन्याय माना जाएगा।
हनुमान बेनीवाल की फेहरिस्त में सबसे ऊपर पेट्रोल और डीजल पर वैट (VAT) कम करने की मांग है। राजस्थान में पड़ोसी राज्यों की तुलना में तेल की कीमतें अधिक हैं, जिसे लेकर बेनीवाल लंबे समय से मुखर रहे हैं। उनका तर्क है कि वैट कम होने से न केवल महंगाई कम होगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट और आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी।
किसान राजनीति के केंद्र माने जाने वाले बेनीवाल ने मांग की है कि बूंद-बूंद सिंचाई परियोजना के तहत दिए जाने वाले कृषि कनेक्शनों को एक वर्ष के भीतर ही नियमित किया जाए। फिलहाल किसानों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने कई गांवों में नए 33/11 KV GSS और 132 KV GSS स्वीकृत करने की भी बात कही है ताकि बिजली की समस्या दूर हो सके।
नागौर पंचायती राज की जननी माना जाता है (1959 में यहीं से शुरुआत हुई थी)। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए बेनीवाल ने नागौर में पंचायती राज शोध संस्थान के लिए भूमि और बजट आवंटन की पुरजोर मांग की है। यह संस्थान न केवल नागौर बल्कि पूरे देश के पंचायती राज ढांचे के अध्ययन का केंद्र बन सकता है।
परिवहन और कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए सांसद ने दो दर्जन से अधिक सड़क मार्गों के सुदृढ़ीकरण, चौड़ाईकरण और नवीनीकरण की मांग की है। इसमें विशेषकर नागौर और नवनिर्मित डीडवाना-कुचामन जिले के मुख्य मार्ग शामिल हैं। साथ ही, यातायात के दबाव को देखते हुए विभिन्न रेलवे फाटकों पर ROB (Overbridge) और कस्बों में बाईपास निर्माण की घोषणा करने का आग्रह किया है।
बेनीवाल ने बजट में सरकारी बुनियादी ढांचे को सुधारने पर भी जोर दिया है:
- पेट्रोल -डीजल पर वैट घटाने,
- बूंद -बूंद सिंचाई परियोजना के अंतर्गत दिए जाने वाले कृषि कनेक्शनों को एक वर्ष में ही नियमित करने
- नागौर में पंचायती राज शोध संस्थान हेतु भूमि व बजट आवंटन करने की मांग की ,
- नागौर व डीडवाना-कुचामन जिले में दो दर्जन से अधिक सड़क मार्गों पर सुदृढ़ीकरण, चौड़ाईकरण व नवीनीकरण की घोषणा करने
- विभिन्न रेलवे फाटकों पर ROB बनाने
- विभिन्न कस्बों में बाईपास निर्माण करने ,
- उप -स्वास्थ्य केंद्रों को PHC में तथा PHC को CHC में
- कई गांवों में नवीन 33/11 KV GSS व 132 KV GSS स्वीकृत करने
- विभिन्न जर्जर सरकारी स्कूलों के भवनों के पुन: निर्माण हेतु बजट आवंटित करने
- गुढ़ा भगवानदास व पांचौड़ी सहित कुछ और स्थानों पर सरकारी महाविद्यालय की घोषणा भी बजट में करने की मांग रखी है
हनुमान बेनीवाल की ये मांगें केवल विकास के लिए नहीं, बल्कि एक 'सियासी प्रेशर' भी हैं। नागौर और आसपास के जिलों में बेनीवाल का मजबूत वोट बैंक है। बजट में इन मांगों को जगह मिलने का सीधा मतलब होगा कि सरकार क्षेत्रीय संतुलन और विपक्षी आवाजों को महत्व दे रही है। खासकर पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाना सरकार के लिए एक कड़ी चुनौती हो सकता है।