
Rajasthan Culture News: इस साल राजस्थान दिवस एक नई परंपरा के साथ मनाया जाएगा। 2026 में यह 19 मार्च को आयोजित होगा, जो कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन है। पहले यह दिवस हर साल 30 मार्च को मनाया जाता था, जबकि पिछले बरस इसे 25 मार्च को मनाया गया था। अब राज्य सरकार ने तय किया है कि आगे से राजस्थान दिवस की तारीख हिंदी पंचांग के अनुसार तय की जाएगी।
राजस्थान दिवस को लेकर पर्यटन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम जयपुर के अल्बर्ट हॉल परिसर में आयोजित होंगे, जहां लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और परंपरा को दर्शाने वाले आयोजन होंगे। इसके अलावा जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, उदयपुर सहित कई शहरों में भी लाइट एंड साउंड शो, लोक नृत्य और पर्यटन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजस्थान दिवस का इतिहास प्रदेश के एक होने से जुड़ा हुआ है। 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर सहित कई रियासतों के विलय के बाद वृहत्तर राजस्थान संघ का गठन हुआ था। इससे पहले यह क्षेत्र राजपूताना कहलाता था। राजस्थान का एकीकरण सात चरणों में पूरा हुआ, जिसकी शुरुआत 1948 में अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली के विलय से हुई थी। धीरे-धीरे अन्य रियासतों के जुड़ने के बाद आज का राजस्थान अस्तित्व में आया।
राजस्थान दिवस और राजस्थान स्थापना दिवस अलग-अलग अवसर हैं। जहां राजस्थान दिवस 1949 में वृहत्तर राजस्थान संघ के गठन की याद में मनाया जाता है, वहीं 1 नवंबर 1956 को अंतिम रूप से राज्य के गठन के बाद स्थापना दिवस मनाया जाता है। इसी दिन अजमेर मेरवाड़ा के विलय के साथ वर्तमान राजस्थान की संरचना पूरी हुई थी।
राजस्थान दिवस केवल ऐतिहासिक दिन ही नहीं, बल्कि प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और पर्यटन को दिखाने का भी बड़ा अवसर है। इस मौके पर प्रमुख पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक स्मारकों को सजाया जाता है, रोशनी की जाती है और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए राजस्थान की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाया जाता है।