जयपुर

Patrika Impact : ‘अपनी उपज-अपना उद्योग’ अभियान पर भजनलाल सरकार की मुहर, फ़ूड प्रोसेसिंग नीति को मंज़ूरी

Bhajan Lal Cabinet Decisions: भजनलाल कैबिनेट ने कृषि व फूड पार्क नीति 2026 को दी मंजूरी। राजस्थान पत्रिका के अभियान 'अपनी उपज-अपना उद्योग' का बड़ा असर। जानिए किसानों व उद्यमियों को क्या मिलेंगे फायदे।
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Aug 08, 2026
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Rajasthan CM Bhajan Lal Sharma - File PIC

राजस्थान में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनके कृषि उत्पादों को नया बाजार देने की दिशा में एक बहुत बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार ने 'राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026' और 'राजस्थान फूड पार्क विकास नीति-2026' को अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। यह फैसला प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए राजस्थान पत्रिका के विशेष अभियान 'अपनी उपज-अपना उद्योग' की एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता है। पत्रिका द्वारा सरकार को प्रस्तुत किए गए विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट की तर्ज पर ही राज्य सरकार ने अब कृषि उपज को 'खेत से बाजार' तक एक मजबूत वैल्यू चेन में पिरोने का ठोस खाका तैयार कर लिया है।

पत्रिका अभियान की जीत

राजस्थान पत्रिका ने सदैव प्रदेश के किसानों के हित में आवाज बुलंद की है। पत्रिका के 'अपनी उपज-अपना उद्योग' अभियान के तहत यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था कि राज्य के किसान केवल कच्चे माल के उत्पादक बनकर न रह जाएं, बल्कि अपनी उपज की प्रोसेसिंग कर खुद के उद्योग स्थापित करें।

कैबिनेट के इस ताजा फैसले ने पत्रिका की इस सोच और जनहितैषी अभियान पर मुहर लगा दी है। सरकार की इस नई नीति से अब राज्य के किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिलेगा और प्रोसेसिंग इकाइयों के माध्यम से गांवों में ही रोजगार के ढेरों अवसर पैदा होंगे।

इन उद्योग-फसलों को सीधा प्रोत्साहन

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि नई नीति का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देना और कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) करना है। इस नीति के दायरे में निम्नलिखित क्षेत्रों को शामिल किया गया है:

कृषि व बागवानी उत्पाद: फल, सब्जी, मसाले, अनाज, दलहन और तिलहन।

डेयरी व अन्य उत्पाद: दूध, शहद, औषधीय पौधे, गौण वन उपज और पशु आहार पर आधारित उद्योग।

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: कोल्ड स्टोरेज, साइलो (Silos), वेयरहाउस और आधुनिक सप्लाई चेन नेटवर्क।

श्री अन्न (Millets) प्रोत्साहन: मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए राज्य में एक समर्पित 'श्री अन्न प्रोत्साहन एजेंसी' का गठन किया जाएगा।

सब्सिडी का गणित: 60% तक की भारी आर्थिक मदद

राज्य सरकार ने कृषि आधारित उद्योग लगाने वाले उद्यमियों और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया है:

₹50 लाख तक के ऋण पर: 60 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी।

₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक के ऋण पर: 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी।

₹1 करोड़ से अधिक के ऋण पर: 40 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम सब्सिडी सीमा ₹1.5 करोड़ तक)।

विशेष छूट (5% अतिरिक्त सब्सिडी): महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), जनजातीय उप-योजना (TSP) क्षेत्रों के उद्यमियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहन देने के लिए 5 प्रतिशत की अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी।

इसके अलावा, कोल्ड स्टोरेज, साइलो और निर्यात-उन्मुख बुनियादी ढांचे के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) 2024 के तहत भी सब्सिडी का विस्तार किया जाएगा।

हर जिले में बनेंगे क्लस्टर आधारित 'फूड पार्क'

राजस्थान को एग्री-प्रोसेसिंग हब बनाने के लिए 'फूड पार्क विकास नीति-2026' को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत राज्य के हर जिले में चरणबद्ध तरीके से क्लस्टर आधारित मॉडल पर विश्वस्तरीय फूड पार्क विकसित किए जाएंगे।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP): फूड पार्कों के विकास में पीपीपी मॉडल के जरिए निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

प्राइमरी इन्वेस्टर्स को प्राथमिकता: 'राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2024' में एग्री-प्रोसेसिंग के लिए एमओयू (MoU) करने वाले डेवलपर्स और ₹10 करोड़ का न्यूनतम निवेश करने वाले एंकर प्रोसेसिंग यूनिट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

Updated on:
08 Aug 2026 08:56 am
Published on:
08 Aug 2026 08:44 am