
जयपुर।
आखिरकार दो साल बाद राज्य सरकार प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिए जाग ही गई और प्रदेश में महिला अत्याचार रोकने के लिए अलग से गठित पुलिस विंग के लिए नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी। इस विंग के लिए पुलिस अधीक्षक सहित 35 पद सृजित किए गए हैं। महिलाओं पर अपराध के मामले में अव्वल प्रदेश के सात जिलों में प्रारंभिक तौर पर इस विंग का गठन किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार गृहमंत्रालय ने करीब दो साल पहले महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिए देशभर में इन्वेस्टिगेशन यूनिट क्राइम अगेंस्ट वूमन 'आईयूसीएडब्ल्यू' विंग के गठन के निर्देश दिए थे। इसके बाद क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार प्रदेश में महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार और अपराध के जिले छांटे गए। इसमें अजमेर , श्रीगंगानगर, अलवर, उदयपुर , प्रतापगढ़, झालावाड़ और जोधपुर (पूर्व) महिला अत्याचार के मामले में अव्वल निकले। इसके बाद इनमें इस साल आईयूसीएडब्ल्यू विंग के गठन का निर्णय लिया गया और पदों की स्वीकृति जारी की गई है।
..आईयूसीएडब्ल्यू विंग के लिए ये अफसर ...
राज्य सरकार ने आईआईयूसीएडब्ल्यू विंग के गठन के लिए 35 पदों के सृजन की मंजूरी दी है। विंग में प्रत्येक जिले में एक पुलिस अधीक्षक, दो निरीक्षक, एक—एक एएसआई तथा ड्राइवर कांस्टेबल के पद रहेंगे। इसके अलावा हल्के चार पहिया वाहन और मोटरसाइकिल भी स्वीकृत की गई है।
आधा खर्च उठाएगा केंद्र
जानकारी के अनुसार आईआईयूसीएडब्ल्यू विंग पर होने वाले खर्च में आधा राशि का भुगतान केंद्र सरकार करेगी। केंद्र सरकार ने इन विंगों पर खर्च होने वाली राशि में अधिकतम 28 लाख या पचास प्रतिशत पुनर्भरण का प्रावधान किया है।
दोबारा फाइल भेजी तो सीएम ने किया मंजूर
सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्रालय ने विंग पर होने वाले खर्च का पुनर्भरण दो साल के लिए करने का प्रावधान किया है। इसे देखकर पर विंग के गठन की स्वीकृति जारी होने के बाद भी वित्त विभाग ने मना कर दिया था। इसके बाद गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री के पास फिर फाइल भेजी। एक बार तो मुख्यमंत्री राजे ने भी वित्त विभाग के निर्णय पर सहमति जताई। इसके बाद पिछले दिनों दोबारा फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी गई, जिस पर पदों के सृजन को मंजूरी दी गई।