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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अवैध रिजॉर्ट पर JDA की कार्रवाई पर ट्रिब्यूनल ने लगाई अंतरिम रोक, 8 सितंबर को सुनवाई

अवैध निर्माण और कृषि एवं आवासीय भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच जयपुर विकास प्राधिकरण अपीलीय अधिकरण ने जयपुर-अजमेर रोड स्थित कथित एक अवैध रिजॉर्ट के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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जयपुर

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Manish Chaturvedi

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Updated: 2 Aug 2026, 3:45 PM IST

Jda jaipur

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जयपुर। अवैध निर्माण और कृषि एवं आवासीय भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच जयपुर विकास प्राधिकरण अपीलीय अधिकरण ने जयपुर-अजमेर रोड स्थित कथित एक अवैध रिजॉर्ट के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। जयपुर-अजमेर रोड स्थित कथित अवैध रिजॉर्ट के खिलाफ जयपुर विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। जेडीए अपीलीय अधिकरण ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए नोटिसों की क्रियान्विति और आगे की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय आने तक रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 8 सितंबर को होगी। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के बाद अवैध निर्माणों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जारी हुए थे नोटिस

जेडीए ने 24 जुलाई को जयपुर-अजमेर रोड पर कृषि भूमि पर संचालित बताए जा रहे 7 आर रिजॉर्ट सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नोटिस जारी किए थे। प्राधिकरण का आरोप था कि संबंधित भूमि का उपयोग स्वीकृत भू-उपयोग के विपरीत किया जा रहा है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित पक्ष ने राहत के लिए JDA अपीलीय अधिकरण में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान जेडीए अपीलीय अधिकरण के पीठासीन अधिकारी महावीर प्रसाद गुप्ता ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगा दी। अब मामले की विस्तृत सुनवाई 8 सितंबर को होगी।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है सख्त निर्देश

अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। 20 मई 2026 को न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने अवैध निर्माण और भूमि उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इससे पहले 25 मार्च 2026 को अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों के नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को व्यापक सर्वे कराने तथा कृषि और आवासीय भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

इसी प्रकरण से जुड़े एक आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दावा किया गया है कि संबंधित कृषि भूमि पर 7R रिजॉर्ट सहित कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शिकायतों और पूर्व न्यायिक आदेशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही मामले को सुप्रीम कोर्ट के अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत शामिल कर कार्रवाई की मांग की गई है।

अभी अंतिम फैसला बाकी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अपीलीय मंच से अंतरिम रोक मिलना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले का अंतिम फैसला संबंधित पक्ष के पक्ष में हो गया है। अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सुनवाई पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा।