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PATRIKA PODCAST : मौसी-बुआ की पाठशालाएं

प्रेम, करुणा, लगाव, सुरक्षा आदि से भावनात्मक मस्तिष्क का उचित विकास होता है। यह मन का जैविक आधार है जहां भावनाएं पल्लवित होती हैं।
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Gulab Kothari Article : मौसी माता की सहोदरा है अत: उसके साथ भी वही अन्न जुड़ा है, जो माता के साथ जुड़ा है। मां और मौसी दोनों की देह ‘नानी’ के शरीर से बनी है। यहां अन्न के कारण ‘अन्नमय कोश’ व अन्न के सार भाग से निर्मित मन के कारण ‘मनोमय कोश’ मां-मौसी दोनों में समान रूप से बनते हैं।