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PATRIKA PODCAST : साधना की सिद्धि संकल्प से

साधना एक क्रमिक विकास है। एक पद्धति से ही की जाती है। जैसे शिक्षा में एक-एक कक्षा उत्तीर्ण करके आगे बढ़ा जाता है। यही साधना है। जप और तप भी साधना के भिन्न स्वरूप ही हैं। साधना तो लक्ष्य प्राप्ति का प्रयास ही है।
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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : साधना को लक्ष्य से जोडऩे का कार्य व्यक्ति का संकल्प करता है। जिस क्षण में व्यक्ति संकल्प करता है, उसी क्षण उसकी साधना शुरू हो जाती है। संकल्प ही हर परिस्थिति में मार्ग निकाल लेता है। संकल्प ही मन को तपने के लिए तैयार करता है। संकल्प ही उपलब्धियों का मूल है। संकल्प के कारण ही साधना सम्पन्न होती है और व्यक्ति सूक्ष्म में प्रवेश कर जाता है।