
जयपुर: हाईकोर्ट ने तबादलों से जुड़ी 391 याचिकाओं का एक साथ निस्तारण करते सरकारी विभागों में मनमाने तबादलों पर नाराजगी जताते हुए प्रदेश में पारदर्शी तबादला नीति की जरूरत बताई। कोर्ट ने तबादला नीति के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आलोक शर्मा, महाधिवक्ता एवं मुख्य सचिव की राज्य स्तरीय समिति बनाई है, जो दो महीने में मसौदा तैयार करेगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तबादला सरकारी सेवा की सामान्य प्रक्रिया है, किसी कर्मचारी को एक ही स्थान पर बने रहने का निहित या मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है। साथ ही हिदायत दी कि तबादले कानून, सेवा नियमों, नीतियों, निर्धारित प्रक्रियाओं और निष्पक्षता के सिद्धांतों के दायरे में ही किए जाएं।
न्यायाधीश समीर जैन ने डॉ. महेश मीणा और अन्य की तबादला संबंधी याचिकाओं पर 11 अगस्त को सुनवाई पूरी कर ली थी, जिस पर सोमवार को करीब 80 पेज का यह आदेश सुनाया। आदेश में तबादले संबंधी व्यक्तिगत शिकायतों के निस्तारण के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों से सात दिन में कमेटी बनाने को भी कहा गया है।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि कर्मचारी निर्णय की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपनी मेडिकल, पारिवारिक, दिव्यांगता या सेवा संबंधी न्यायसंगत परिस्थितियों का ब्योरा देते हुए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं, जिस पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा। वर्तमान याचिकाकर्ताओं के विवादित तबादला आदेशों पर अभ्यावेदन के निस्तारण तक या फैसले की तारीख से 30 दिनों तक रोक रहेगी। नई जगह ज्वाइन न करने के मामलों पर हाईकोर्ट ने कहा कि मूल विवाद का समाधान हुए बिना दंडात्मक कार्रवाई न हो।
राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल में तबादलों के लंबित मामलों के भारी दबाव को देखते हुए उनके प्रभावी कामकाज और शीघ्र निस्तारण के लिए किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष/प्रमुख के रूप में नियुक्त या नामांकित करने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा है।
कार्यकाल व रोटेशनः कर्मचारी की न्यूनतम एवं अधिकतम तैनाती अवधि तय करना, समय से पूर्व तबादले की विशेष परिस्थितियां और रोटेशन के सिद्धांत।
पारदर्शिता व प्रक्रियाः तबादलों की स्पष्ट प्रक्रिया, डिजिटलाइजेशन, पारदर्शी रिकॉर्ड-कीपिंग और जहां व्यावहारिक हो वहां काउंसलिंग के जरिए हो।
संरक्षित व मानवीय श्रेणियांः पति-पत्नी के एक साथ पदस्थापन के मामले, निकट सेवानिवृत्ति व खास श्रेणी के कर्मचारियों के लिए विशेष रियायतें।
कठिन व पिछड़े क्षेत्रः दुर्गम, दूरस्थ, सीमावर्ती और 'डार्क जोन' क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान और उनकी सेवा अवधि का संतुलन।
बिना नीति तबादले होने और उसके कारण उत्पन्न समस्याओं से जुडे पहलुओं को लेकर राजस्थान पत्रिका ने अभियान चलाया था, जिसमें दूसरे राज्यों में तबादला नीति और नीति बिना तबादले होने से अदालतों में मुकदमों का अंबार होने का मुद्दा उठाया था।
कर्मचारियों की शिकायतों के समय पर निस्तारण करने के लिए हाईकोर्ट ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, डिस्कॉम, वित्तीय संस्थानों और गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के सर्वोच्च अधिकारियों को सात कार्यदिवसों के भीतर 'विभाग स्तरीय ग्रिवांस कमेटी' गठित करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने एक मामले में 1989 में आदेश दिया था कि सरकार तबादला नीति बनाए, जिसकी पालना न होने पर अवमानना याचिका दायर की थी। लंबे अंतराल के बाद दायर होने के कारण नई याचिका दायर करने की छूट देते हुए हाईकोर्ट ने वह खारिज कर दी थी।