जयपुर

राजस्थान: PM मोदी, शाह और रविशंकर के खिलाफ दायर याचिका खारिज, वकील पर 50 हजार हर्जाना, ये रहा पूरा मामला

राजस्थान हाईकोर्ट ने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पूर्व विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर याचिकाकर्ता वकील पर 50 हजार जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा, न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सस्ती लोकप्रियता के लिए याचिकाएं बर्दाश्त नहीं।

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Sep 25, 2025
PM मोदी, शाह और रविशंकर के खिलाफ दायर याचिका खारिज

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पूर्व विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए किसी भी व्यक्ति को फिजूल की याचिका दायर करने और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।


न्यायाधीश सुदेश बंसल ने अधिवक्ता पूरण चंद्र सेन की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने टिप्पणी किया कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता है, उससे मनमाने तरीके से कार्य करने की अपेक्षा नहीं की जाती। जब कोई फिजूल की या परेशान करने वाली याचिका दायर करता है तो न्यायालय का कर्तव्य है कि ऐसी याचिका को तत्काल खारिज किया जाए और भविष्य में ऐसी याचिकाओं को रोकने के लिए याचिकाकर्ता पर हर्जाना लगाए।

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याचिका में यह…


याचिकाकर्ता ने बताया था कि पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और तत्कालीन विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नागरिकता अधिनियम में संशोधन के जरिए देश की एकता-अखंडता खतरे में डालने तथा मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव का काम किया।

नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 के बाद कई जगह सांप्रदायिक हिंसा हुई, ऐसे में आपराधिक मामला दर्ज कर जांच कराई जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि अलवर जिले के गोविंदगढ़ थाने में मामला दर्ज नहीं किया और अधीनस्थ अदालत ने क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला बता एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया।


‘न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया’


केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तोगी ने बहस की। रस्तोगी ने कहा कि सीएए संसद ने पारित किया और पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पूर्व विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद संसद में सांसद मात्र थे। गोविंदगढ़ में मामले का अधिकार क्षेत्र नहीं है।


याचिकाकर्ता ने न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग किया और ऐसी याचिकाएं अदालतें भारी हर्जाना लगाकर खारिज करती रही हैं। इसके अलावा सीएए का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में अधीनस्थ अदालत का परिवाद खारिज करने का निर्णय सही है। महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने भी याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

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Updated on:
25 Sept 2025 08:11 am
Published on:
25 Sept 2025 08:10 am
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