Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया नोटिस वैध नहीं है।
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले वॉट्सऐप पर भेजे गए नोटिस को वैध नहीं मानते हुए एक मामले में नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल व्हाट्सऐप से नोटिस सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत वैध नहीं है, उसके आधार पर गिरफ्तारी वैयक्तिक स्वतंत्रता का हनन है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अवमानना का दोषी मानते हुए एसीबी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहे आइपीएस अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ को सजा पर सुनवाई के लिए 6 अप्रेल को तलब किया है।
न्यायाधीश प्रवीर भटनागर ने आरएसएलडीसी रिश्वत प्रकरण में रवि मीणा की अवमानना याचिका पर यह आदेश दिया। अधिवक्ता अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने कोर्ट को बताया कि एसीबी ने 25 जनवरी 2023 को व्हाट्सऐप के जरिए नोटिस भेजकर याचिकाकर्ता को 31 जनवरी को तलब किया। इस पर पत्नी की बीमारी के आधार पर समय मांगा, लेकिन एसीबी ने बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए एक फरवरी 2023 को गिरफ्तार कर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा कि एसीबी कार्रवाई सीआरपीसी की धारा 41 ए का उल्लंघन है।
इसके जवाब में एसीबी ने कहा कि आरोपी को नोटिस दिया, उसने जवाब में टालमटोल किया। याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन एफआईआर रद्द करवाने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद अनुसंधान एजेंसी पर दबाव बनाने के लिए यह अवमानना याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि नोटिस की तामील निर्धारित प्रक्रिया यानि व्यक्तिगत तामील, चस्पा और स्पीड पोस्ट आदि से ही होनी चाहिए। नोटिस का पालन होने पर बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।
एक दूसरे केस में हाईकोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर अदालती आदेश का पालन न करने पर कुलपति अल्पना कटेजा को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने नीरज खींचड़ की ओर से दायर अवमानना याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
अधिवक्ता तुषार पंवार ने अदालत को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने गत 19 दिसंबर को छात्रसंघ चुनाव से संबंधित याचिका का निस्तारण करते हुए विवि प्रशासन को निर्देश दिए थे कि 19 जनवरी, 2026 को बैठक कर उसके 15 दिनों में निर्णय को अधिसूचित किया जाए।
याचिका में कहा गया कि विवि प्रशासन ने तय अवधि बीतने के बाद भी बैठक के निर्णय को अधिसूचित नहीं किया, जो अदालती आदेश की जानबूझकर की गई अवमानना है।