जयपुर

Rajasthan High Court : जयपुर में चारदीवारी में अवैध निर्माणों पर राजस्थान हाईकोर्ट चिंतित, 2 सप्ताह में मांगा जवाब

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने 'पिंक सिटी' (जयपुर) की वैश्विक पहचान के संरक्षण, सुरक्षा और रख-रखाव से जुड़ी चिंताओं पर स्वत: संज्ञान लिया है। सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा।
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Rajasthan High Court : फाइल फोटो पत्रिका।

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने 'पिंक सिटी' (जयपुर) की वैश्विक पहचान के संरक्षण, सुरक्षा और रख-रखाव से जुड़ी चिंताओं पर स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायाधीश प्रमोद कुमार माथुर ने 'राजस्थान पत्रिका' में 24 सितंबर को प्रकाशित समाचार ‘परकोटा की पुकार… बिगड़ती धड़कनें सुनो, मैं विश्व विरासत हूं, आपके शहर का दिल भी’ पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर फाइल रजिस्ट्री के जरिए उचित बेंच में भेजने के निर्देश दिए थे।

राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक रूप से समृद्ध 'दीवारों से घिरे शहर' के हो रहे चिंताजनक क्षरण (अलार्मिंग डिग्रेडेशन) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा है कि वर्ष 2019 में 'पिंक सिटी' को मिले प्रतिष्ठित 'यूनेस्को विश्व विरासत स्थल' के दर्जे को बचाने के लिए तत्काल, प्रभावी और ठोस कदम उठाने की गंभीर आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने वर्ष 2025 में विश्व विरासत समिति द्वारा दिए गए निर्णयों और अपनाए गए ड्राफ्ट निर्णयों का भी अवलोकन किया है। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं।

अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी

महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने सरकार एवं अन्य की ओर से जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। मामले पर अब अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। इस मामले में अधिवक्ता संदीप पाठक, युवराज सामंत, मधुसूदन सिंह राजपुरोहित और अनिरुद्ध माथुर को न्यायमित्र नियुक्त किया गया है।

संवैधानिक कर्तव्य और धरोहर पर खतरा

एकल पीठ ने चेतावनी दी है कि यदि दिसंबर 2026 से पहले सुधार के कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर अपने इस प्रतिष्ठित यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के टैग को गंवा सकता है। साल 2019 में जयपुर की अनूठी शहरी नियोजन, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया था।

चारदीवारी के कोर और बफर जोन में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण, अनधिकृत बदलाव और अतिक्रमण हो रहे हैं। पारंपरिक हवेलियों और ऐतिहासिक परिसरों को नियमों को ताक पर रखकर तोड़ा जा रहा है और उनकी जगह आधुनिक बेमेल व्यावसायिक इमारतें खड़ी की जा रही हैं। कोर्ट ने कहा है कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल एक नीतिगत मामला नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य संवैधानिक कर्तव्य है।

Updated on:
02 Oct 2026 08:51 pm
Published on:
02 Oct 2026 08:50 pm