जयपुर

हाईकोर्ट का सख्त आदेश, 15 माह का बकाया वेतन दें, नहीं तो पंचायतीराज आयुक्त व स्थानीय निकाय निदेशक का भी रोकें वेतन

Rajasthan High Court Order : राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त आदेश। हाईकोर्ट ने नगरपालिका कर्मचारी के 15 माह के बकाया वेतन का 15 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया। नहीं तो पंचायतीराज आयुक्त व स्थानीय निकाय निदेशक का वेतन भी रोका जाए।
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Rajasthan High Court Strict Order Pay 15 Months Salary Arrears otherwise Stop Salary of Panchayati Raj Commissioner and Local Body Director

Rajasthan High Court Order : राजस्थान हाईकोर्ट ने नगरपालिका कर्मचारी के 15 माह के बकाया वेतन का 15 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही प्रमुख स्वायत्त शासन सचिव से कहा कि 15 दिन में भुगतान नहीं होने पर पंचायती राज आयुक्त, स्थानीय निकाय निदेशक और महवा नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी का वेतन रोक दिया जाए। इसकी पालना नहीं होने पर मुख्य सचिव से प्रमुख स्वायत्त शासन सचिव का वेतन रोकने को कहा है।

संतराम शर्मा की याचिका पर दिया यह आदेश

न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने संतराम शर्मा की याचिका पर यह आदेश दिया। अधिवक्ता केपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि 18 फरवरी को राज्य सरकार को आखिरी मौका देते हुए याचिकाकर्ता का बकाया वेतन रोकने का कारण पूछा गया। सरकारी वकील के आग्रह पर जवाब के लिए समय दिया गया। इसके बाद सरकार की ओर से कोई वकील हाजिर नहीं हुआ। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी के बकाया वेतन का 15 दिन में भुगतान कर दिया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों का वेतन रोक दिया जाए।

बिल्डर पर 5.20 लाख रुपए हर्जाना

जिला उपभोक्ता आयोग-द्वितीय ने लैट का कब्जा सौंपने में देरी को सेवादोष और अनुचित व्यापार प्रथा मानते हुए बिल्डर पर 5.20 लाख रुपए का हर्जाना लगाया। साथ ही जमा कराई गई राशि सहित कुल 36.58 लाख रुपए नौ फीसदी ब्याज सहित लौटाने को कहा। आयोग अध्यक्ष ग्यारसी लाल मीणा और सदस्य हेमलता अग्रवाल ने पवन चौपड़ा व अन्य के परिवाद पर यह आदेश दिया। परिवादी ने सिद्धा इंफ्रा प्रोजेक्टस प्रा. लि. के अजमेर रोड स्थित प्रोजेक्ट सिद्धा आंगन फेज-2 की मयूर आवासीय योजना में लैट खरीदने के लिए 17 सितबर 2018 को करार किया था। इसके अनुसार बिल्डर को जुलाई 2019 को लैट का कब्जा सौंपना था, लेकिन बिल्डर ने तय समय तक कब्जा नहीं दिया। परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में बताया कि उसने बिल्डर को 26.21 लाख रुपए अग्रिम और होम लोन के ब्याज के तौर पर बैंक को 5.27 लाख का भुगतान किया। परिवाद में लैट खरीदने व अन्य मदों पर किए गए खर्चें और मानसिक संताप के लिए अतिरिक्त राशि दिलाने की गुहार की।

Updated on:
02 Mar 2025 08:34 am
Published on:
02 Mar 2025 08:34 am