जयपुर

राजस्थान हाईकोर्ट ने सांसद राव राजेंद्र सिंह को क्यों किया तलब? लोकसभा चुनाव से जुड़ा है विवाद, जानें मामला

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राव राजेंद्र सिंह को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की एकल पीठ ने सांसद को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।

2 min read
Oct 30, 2025
फोटो- पत्रिका नेटवर्क

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से भाजपा सांसद राव राजेंद्र सिंह को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की एकल पीठ ने सांसद को 1 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह निर्देश कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार अनिल चोपड़ा की चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें 2024 लोकसभा चुनाव के मतपत्रों की पुनर्गणना की मांग की गई है।

अदालत ने सांसद पर नोटिस तामील न होने के कारण अखबार में प्रकाशन के जरिए नोटिस जारी करने और उनके निवास पर चस्पा करने का भी आदेश दिया।

ये भी पढ़ें

अंता उप-चुनाव: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने नरेश मीणा को दिया समर्थन, इस तरह की वोट देने की अपील; देखें VIDEO

लोकसभा चुनाव का है मामला

दरअसल, 2024 लोकसभा चुनाव में जयपुर ग्रामीण सीट पर हुई मतगणना में अनियमितता के आरोप हैं। आधिकारिक परिणामों के अनुसार, भाजपा के राव राजेंद्र सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चोपड़ा को मात्र 1615 मतों के अंतर से हराया। हालांकि, चोपड़ा ने दावा किया कि निर्वाचन विभाग की उसी दिन जारी नोट शीट में 2738 बैलेट पेपर खारिज होने का उल्लेख था।

उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर को शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अधिकारी ने केवल 1225 बैलेट खारिज बताकर पुनर्गणना से इनकार कर दिया। याचिका में कहा गया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत खारिज मतपत्रों को उम्मीदवारों को दिखाना अनिवार्य है, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। चूंकि जीत का अंतर (1615 वोट) खारिज मतों की संख्या से कम है, इसलिए पुनर्गणना जरूरी है।

पहले भी जारी हो चुका है नोटिस

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संजय शर्मा ने अदालत को अवगत कराया कि पहले भी 20 अगस्त को सांसद सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन राव राजेंद्र सिंह पर नोटिस तामील नहीं हो सका। सिंह अदालत में पेश नहीं हुए, जिससे मामले में देरी हो रही है।

अदालत ने इस पर सख्ती दिखाते हुए नोटिस को सांसद के निवास के बाहर चस्पा करने और समाचार पत्र में प्रकाशित करने का निर्देश दिया। साथ ही, निर्वाचन आयोग की ओर से पैरवी न करने पर अदालत ने आयोग को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस भारवानी ने स्पष्ट किया कि बार-बार नोटिस की अनदेखी से न्याय प्रक्रिया बाधित हो रही है, इसलिए सांसद को व्यक्तिगत पेशी अनिवार्य है।

ये भी पढ़ें

अंता उपचुनाव: पाड़लिया गांव के लोगों ने क्यों दी मतदान बहिष्कार की चेतावनी? जानें क्या है नाराजगी

Published on:
30 Oct 2025 03:18 pm
Also Read
View All

अगली खबर