राजधानी जयपुर समेत राजस्थान में अप्रैल महीने में मौसम ने दो रंग दिखाए। एक तरफ तेज गर्मी और लू का असर रहा, तो दूसरी ओर बीच-बीच में पश्चिमी विक्षोभ के कारण आंधी और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट देखने को मिली।
जैसलमेर: राजस्थान में इस वर्ष मौसम के मिजाज ने आमजन के साथ-साथ मौसम वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। अप्रेल के महीने में ही प्रदेशभर में मौसम के दो बेहद विरोधाभासी रंग देखने को मिले।
एक तरफ जहां महीने की शुरुआत और मध्य में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण आंधी और हल्की बारिश ने तापमान में पांच डिग्री तक की गिरावट लाकर राहत दी। वहीं, दूसरी ओर अप्रेल के दूसरे और तीसरे सप्ताह से शुरू हुई भीषण गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।
जयपुर मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, बीते 10 वर्षों में इस बार का अप्रेल महीना सबसे गर्म दर्ज किया गया है। थार के रेगिस्तानी इलाकों में पारा अभी से ही 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जिसके चलते आगामी महीनों में गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड टूटने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, मई के दूसरे सप्ताह तक प्रदेशवासियों को भीषण लू से थोड़ी राहत मिल सकती है। इस दौरान जयपुर और आसपास के इलाकों में अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है।
जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक, आगामी 4 से 5 दिनों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से प्रदेश में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान सामान्य के आसपास बना रहेगा और फिलहाल हीटवेव से राहत मिलेगी।
राहत का यह दौर मई के तीसरे सप्ताह तक ही सीमित रहने की उम्मीद है। मई के आखिरी सप्ताह में नौतपा की शुरुआत होगी, जिसके बाद प्रदेश में सामान्य से अधिक और अत्यधिक तीव्र हीटवेव चलने के आसार हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मई के अंत तक रेगिस्तानी इलाकों में पारा 47 डिग्री के पार जा सकता है।
थार का मरुस्थल वर्तमान में पूरी तरह 'फायर मोड' पर है। सामान्यतः मई के अंत या जून में दर्ज होने वाला तापमान इस बार अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही जैसलमेर और बाड़मेर में दर्ज किया गया। जैसलमेर में पारा 46 डिग्री को पार कर चुका है, जिससे अब 35 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने की कगार पर है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो इस बार दोनों जिलों में तापमान 50 डिग्री के नए मनोवैज्ञानिक स्तर को छू सकता है।
जलवायु विश्लेषक डॉ. आर. के. मेहता के अनुसार, थार में एंटी साइक्लोन की सक्रियता और नमी की कमी ने तापमान के स्तर को असामान्य बना दिया है। दिन और रात के तापमान के बीच का अंतर लगातार घट रहा है, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। यदि हमने जल संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और पारंपरिक पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों को नहीं अपनाया, तो आने वाले सालों में 48 से 50 डिग्री तापमान राजस्थान की सामान्य स्थिति बन जाएगा।