
जयपुर। सरकार को पेश दस्तावेज में आम आदमी गलत जानकारी भर दे तो पुलिस केस दर्ज कर सकती है, लेकिन पुलिस के कुछ शीर्ष अधिकारियों की अचल सम्पत्ति की वार्षिक रिटर्न देख शायद आपके मन में संदेह आ जाए। विला-कॉटेज खरीद मामले में एपीओ आइएएस शिखर अग्रवाल ने अचल संपत्ति रिटर्न (आइपीआर) में पत्नी आइपीएस प्रशाखा माथुर के साथ कुछ सम्पत्ति संयुक्त होने की जानकारी दी है, लेकिन आइपीएस प्रशाखा की आइपीआर खाली है।
इसी तरह आइपीएस स्मिता श्रीवास्तव ने आइपीआर में दो सम्पत्ति बताई है, लेकिन पति आइपीएस आनंद श्रीवास्तव की आइपीआर के हर कॉलम में निल दर्ज हैं। आइपीएस सुष्मित विश्वास की आइपीआर में भी निल दर्ज है। इसी साल जनवरी में आइएएस व आइपीएस अधिकारियों की ओर से ऑनलाइन भरी गई आइपीआर की राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की।
दोनों ही सेवाओं के शीर्ष 25-25 अधिकारियों की आइपीआर का अध्ययन किया। इनमें से किसी भी आइएएस ने आइपीआर में अपनी संपत्ति शून्य नहीं दर्शाई है। लेकिन आइएएस शिखर अग्रवाल की पत्नी आइपीएस प्रशाखा माथुर की आइपीआर में नाम, सेवा, कैडर व बैच के अलावा सब कुछ खाली है।
नेताओं व अफसरों के खानों में निवेश की खबरें तो आती हैं, लेकिन शीर्ष आइएएस-आइपीएस अधिकारियों में से किसी के रिटर्न में खानों में निवेश का जिक्र नहीं है।
1995 बैच की आइपीएस स्मिता श्रीवास्तव की आइपीआर में 2013 में तीन भूखंड बताए गए हैं। उनके पति आइपीएस आनंद श्रीवास्तव की आइपीआर में एक ही पंक्ति में 8 कॉलम में कुल 17 बार निल लिखा है। आइपीएस सुष्मित विश्वास की आइपीआर में भी 17 बार निल लिखा है।