
जयपुर। राज्य में निकायों के बाद अब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे पंचायतों की सत्ता अब प्रशासकों से निकलकर चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में आएगी। हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया 15 नवम्बर तक पूरी कराने को कहा था। इसकी पालना में शनिवार को अपरान्ह तीन बजे राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया, जो 28 नवम्बर तक चलेगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में 28 नवम्बर तक आचार संहिता प्रभावी हो गई।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए पहले चरण में 23 अक्टूबर, दूसरे चरण में 29 अक्टूबर, तीसरे चरण में 4 नवंबर, चौथे चरण में 14 नवंबर को मतदान होगा, परिणाम 20 नवंबर को आएगा। वार्ड पंच एवं सरपंच के लिए पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे चरण में 31 अक्टूबर, तीसरे चरण में 6 नवंबर और चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान होगा।
तीसरे चरण में 3605 ग्राम पंचायतों में धनतेरस के दिन वोटिंग होगी। सभी जगह वोटिंग के दिन ही देर रात तक नतीजे घोषित होंगे। जिला प्रमुख का 25 नवम्बर, उप प्रमुख का 26 नवम्बर तथा प्रधान का 27 नवम्बर व उप प्रधान का 28 नवम्बर को चुनाव होगा।
कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में प्रमुख और 38 प्रधानों का कार्यकाल 22 दिसम्बर तक है, ऐसे में सभी पंचायतीराज संस्था सदस्यों के चुनाव तो अभी होंगे लेकिन प्रमुख-प्रधान का चुनाव दिसंबर में होगा। पंचायतीराज कानून बनने के बाद पहली बार दो से अधिक संतान वालों को भी चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा, वहीं इस बार भी महिलाओं को पिछली बार की तरह ही 50 फीसदी आरक्षण रहेगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने शनिवार को सचिवालय स्थित पंचायतराज सभागार में अपरान्ह तीन बजे चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की।
17 जिला परिषद- अजमेर, अलवर, बाडमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, झालावाड, जोधपुर, फलौदी, कोटा, नागौर, पाली, राजसमंद, सिरोही व उदयपुर
7 जिला परिषद- बांसवाड़ा, दौसा, कोटपूतली-बहरोड़, जालौर, झुंझुनूं, करौली व सीकर
16 जिला परिषद- ब्यावर, खैरथल-तिजारा, बारां, बालोतरा, भरतपुर, डीग, बूंदी, चित्तौडगढ़, चूरू, धौलपुर, हनुमानगढ़, डीडवाना-कुचामन, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर, श्रीगंगानगर व टोंक
सलूम्बर जिला परिषद
जिला प्रमुख चुनाव-25 नवम्बर
उप जिला प्रमुख चुनाव-26 नवम्बर
प्रधान चुनाव-27 नवम्बर
उप प्रधान चुनाव-28 नवम्बर
बारां, श्रीगंगानगर, करौली एवं कोटा जिलों में प्रमुख, उपप्रमुख, प्रधान व उपप्रधान का चुनाव बाद में होगा, हालांकि इनके जिला परिषद सदस्य व पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव पहले ही हो जाएगा। ऐसे में ये सदस्य लंबे समय तक बाड़ेबंदी में रखने पड़ सकते हैं।