जयपुर

जयपुर से कोच्चि वाया दिल्ली : पल-पल बदलता राजनीति का मिजाज, एक आदेश और बिगड़ गई बनती बात

पिछले बुधवार को दिल्ली का मौसम बहुत खुशनुमा था। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली पहुंचते ही बादलों की ओर इशारा करते हुए कहा था- मेरे आते ही दिल्ली का मौसम सुहाना हो गया।

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Sep 28, 2022

अनंत मिश्रा/जयपुर. ठीक एक सप्ताह पहले यानी पिछले बुधवार को दिल्ली का मौसम बहुत खुशनुमा था। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली पहुंचते ही बादलों की ओर इशारा करते हुए कहा था- मेरे आते ही दिल्ली का मौसम सुहाना हो गया। लेकिन गहलोत के जयपुर से कोच्चि वाया दिल्ली के सफर में ऐसा क्या हुआ कि चार दिन बाद ही दिल्ली में कांग्रेस का सियासी मौसम एकाएक बदल गया।

रविवार को ही राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर गहलोत खेमे के विधायकों ने देश भर में ऐसी खलबली मचा दी जिसका तोड़ तीन दिन बाद भी कांग्रेस नहीं निकाल पाई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ देश के तमाम लोग यह जरूर जानना चाहेंगे कि जयपुर से दिल्ली और फिर कोच्चि तक के 2381 किलोमीटर के सफर में ऐसा क्या घटा जिसने गहलोत और गांधी परिवार की नजदीकियों को दूरियों में बदल दिया।

गहलोत ने सप्ताह भर पहले दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में कहा भी कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वे आखिरी समय तक राहुल गांधी को मनाते रहेंगें। यह भी साफ किया कि पद अब मेरे लिए बड़ी बात नहीं है। कांग्रेस की सेवा करना ही मेरा लक्ष्य है। मतलब गहलोत दिल्ली थे तो सब कुछ ठीक था। अगले दिन राहुल से मिलने वे कोच्चि पहुंचे जहां राहुल गांधी से शाम पांच बजे उनकी राहुल गांधी से मुलाकात तय थी।

सुबह शक्ति की आराधना, शाम को शक्ति का प्रदर्शन:
रविवार को शाम सात बजे मुख्यमंत्री आवास पर विधायक दल की बैठक होनी थी। गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविदं सिंह डोटासरा और मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के साथ तनोट चले गए। शक्ति की आराधना करने। दोपहर में विधायकों के शांति धारीवाल के घर जुटने की खबरें आने लगी। राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों को आश्चर्य भी हुआ कि जब बैठक सात बजे तय है तो इस बैठक के मायने क्या हैं। बैठक में जो हुआ वह राजस्थान कांग्रेस में बगावत का पार्ट दो था। इसकी परिणति क्या होगी, एक दो दिन में साफ होगा लेकिन इतना तय है कि अब गहलोत किसी भी पद पर रहें या नहीं उनका कद जरूर घट जाएगा।

सोनिया गांधी के आदेश से हलचल:
अशोक गहलोत के समर्थकों को लग रहा था कि राहुल के बयान के बावजूद सोनिया गांधी गहलोत को दो पदों पर बने रहने की छूट दें देंगी। यह भी अनुमान लगाया जा रहा था कि कम से कम गुजरात विधानसभा चुनाव तक तो मुख्यमंत्री गहलोत ही रहेंगे। लेकिन हलचल मची शनिवार की रात सोनिया गांधी के उस फरमान के बाद जिसमें अगले दिन ही यानी रविवार को मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अजय माकन की मौजदूगी में शाम 7 बजे मुख्यमंत्री के सरकारी निवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने का जिक्र था।

बदले समीकरण:
गहलोत से मुलाकात करने के तीन घंटे पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस में एक व्यक्ति, एक पद की उदयपुर घोषणा की याद दिलाते हुए कहा कि इसका सम्मान किया जाना चाहिए। सीधे तौर पर इसे मुख्यमंत्री पद भी अपने पास रखने की मंशा जाहिर कर चुके गहलोत के लिए संदेश माना गया। इसके साथ ही गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ राजस्थान का मुख्यमंत्री बने रहने के अरमानों पर पानी फिर गया। राहुल से मुलाकात के बाद तो गहलोत की भाषा ही बदल गई। यहां तक कहा कि वे सारे पद छोडक़र राहुल के साथ यात्रा पर चलने को तैयार हैं। दिल्ली में सोनिया और कोच्चि में राहुल से मुलाकात के बाद गहलोत जयपुर लौटे तब तक तो सबकुछ तो नहीं लेकिन कुछ- कुछ ठीक था।

Published on:
28 Sept 2022 11:12 am
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