भारत आदिवासी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। संयोजक संरक्षक प्रो. मणिलाल गरासिया दर्जनों पदाधिकारियों संग कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने बीएपी पर जातिवादी राजनीति का आरोप लगाया।
जयपुर: राजस्थान की सियासत में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) को रविवार को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के स्तंभ माने जाने वाले संयोजक संरक्षक प्रो. मणिलाल गरासिया ने अपने दर्जनों पदाधिकारियों के साथ बीएपी का दामन छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है। यह घटनाक्रम वागड़ अंचल की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
कांग्रेस मुख्यालय में सदस्यता लेने के बाद प्रो. मणिलाल गरासिया ने बीएपी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि जिस उम्मीद के साथ आदिवासियों की आवाज उठाने के लिए इस मंच को तैयार किया गया था, वह अब 'जातिवाद और नफरत' की राजनीति का केंद्र बन गया है।
गरासिया ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के निजी स्वार्थ और दिशाहीनता के कारण क्षेत्र का विकास पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। उन्होंने संकल्प लिया कि अब वे कांग्रेस के साथ जुड़कर भील युवाओं को जातिवादी राजनीति के चंगुल से बाहर निकालेंगे।
प्रो. गरासिया अकेले नहीं गए, बल्कि उनके साथ बांसवाड़ा जिले की पूरी टीम ने पाला बदल लिया है। कांग्रेस में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में शामिल हैं दिलीप पणदा- पूर्व जिलाध्यक्ष, बीटीपी, नारायण बामणिया- गढ़ी ब्लॉक अध्यक्ष, शंकर मईडा- तलवाड़ा अध्यक्ष, सनी भाई डेंडोर- ब्लॉक अध्यक्ष, ट्राइबल मजदूर संघ समेत अन्य पदाधिकारी हेनरी पटेल, नितेश कतिजा, मनीष मईडा, पवन बुझ और दिनेश डाबी।
प्रो. मणिलाल गरासिया न केवल गढ़ी विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं, बल्कि वे भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के भी संरक्षक रहे हैं। वर्तमान में शिक्षक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष होने के नाते उनकी पकड़ बौद्धिक और युवा वर्ग पर मजबूत मानी जाती है।