Rajasthan Politics:: महिला आरक्षण बिल को लेकर राजस्थान में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। दोनों ही दलों ने महिला नेत्रियों को आगे किया है।
जयपुर। महिला आरक्षण बिल को लेकर राजस्थान में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। दोनों ही दलों ने महिला नेत्रियों को आगे किया है। जिसके तहत एक ओर राजधानी जयपुर में इनकी प्रेस वार्ताओं के जरिए माहौल बनाया गया और दूसरी ओर अब आंदोलन को जिला स्तर पर पहुंचा दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस ने अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए 37 महिला नेत्रियों को जिलेवार जिम्मेदारी सौंपी है। दूसरी ओर, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेशभर में व्यापक जनजागरण अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसके जरिए महिला आरक्षण को लागू कराने में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की ओर से खड़े किए गए अवरोधों से जनता को अवगत कराते हुए इसके पक्ष में माहौल तैयार किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में आक्रामक रणनीति अपनाते हुए महिला विधायक, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायकों समेत 37 वरिष्ठ महिला नेताओं को जिलों में जिम्मेदारी दी है। इन नेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला स्तर पर प्रेस वार्ताएं कर पार्टी का पक्ष रखें।
कांग्रेस का कहना है कि वह शुरू से ही महिला आरक्षण की समर्थक रही है और वर्ष 2023 में संसद में इस बिल को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पार्टी की मांग है कि लोकसभा व विधानसभाओं की मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जाए
भाजपा महिला मोर्चा प्रदेशभर में जनजागरण अभियान शुरू करने जा रहा है। इस अभियान के तहत महिला कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में मिलने वाले आरक्षण के महत्व की जानकारी देंगी। भाजपा का फोकस युवतियों और छात्राओं पर भी रहेगा। मंडल स्तर पर महिला विरोधी मानसिकता के खिलाफ विशेष कार्यक्रम होंगे और पदयात्राएं भी निकाली जाएंगी।